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आधार की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ी, मिलता रहेगा योजनाओं का लाभ
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 31 Aug 2017 05:36 AM IST
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मिड डे मील, मनरेगा सहित अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार नबंर प्रस्तुत करने की डेडलाइन 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने बुधवार को यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।
Read Also: इन आसान तरीकों से बस कुछ सेंकेड में आधार कार्ड से लिंक हो जाएगा पैन कार्ड
पहले इसके लिए 30 सितंबर की तारीख तय की गई थी। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब नवंबर में कार्यवाही शुरू होगी।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताभ राय और जस्टिस ए एम खानविल्कर की खंडपीठ से याचिकाकर्ताओं के वकील श्याम दीवान ने यह कहते हुए इस मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया कि नौ जजों की संविधान पीठ ने निजता को मौलिक अधिकार मान लिया है और आधार की समय सीमा 30 सितंबर को खत्म हो रही है।
इस पर अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। खंडपीठ ने कहा कि जब सरकार और समय देने के लिए तैयार है तो कोई जल्दबाजी नहीं है और आधार के खिलाफ सुनवाई नवंबर के पहले हफ्ते में शुरू की जाएगी।
दीवान ने कहा कि निजता को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए जस्टिस आर एफ नरीमन ने अपने फैसले में कहा था कि आधार संबंधी याचिकाओं पर तीन जजों की पीठ द्वारा विचार करना चाहिए। इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच जजों को इसकी सुनवाई करनी चाहिए।
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पहले इसके लिए 30 सितंबर की तारीख तय की गई थी। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब नवंबर में कार्यवाही शुरू होगी।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताभ राय और जस्टिस ए एम खानविल्कर की खंडपीठ से याचिकाकर्ताओं के वकील श्याम दीवान ने यह कहते हुए इस मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया कि नौ जजों की संविधान पीठ ने निजता को मौलिक अधिकार मान लिया है और आधार की समय सीमा 30 सितंबर को खत्म हो रही है।
इस पर अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। खंडपीठ ने कहा कि जब सरकार और समय देने के लिए तैयार है तो कोई जल्दबाजी नहीं है और आधार के खिलाफ सुनवाई नवंबर के पहले हफ्ते में शुरू की जाएगी।
दीवान ने कहा कि निजता को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए जस्टिस आर एफ नरीमन ने अपने फैसले में कहा था कि आधार संबंधी याचिकाओं पर तीन जजों की पीठ द्वारा विचार करना चाहिए। इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच जजों को इसकी सुनवाई करनी चाहिए।
अनिवार्यता पर है रोक
आधार
- फोटो : self
सुप्रीम कोर्ट अपने पहले के कई आदेशों में सरकार को निर्देश दे चुका है कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आधार को अनिवार्य न बनाया जाए। हालांकि अदालत ने कहा है कि सरकार इसके लिए ऐच्छिक रूप से आधार कार्ड मांग सकती है।
केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट को आश्वास्त कर चुकी है कि आधार नहीं होने पर फिलहाल किसी भी व्यक्ति भी लाभकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। आधार न होने की स्थिति में लोगों को पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि में से कोई एक पहचान प्रस्तुत करना होगा।
किसने दायर की याचिका
कर्नाटक हाईकोर्ट के 91 वर्षीय रिटायर्ड जज के एस पुत्तस्वामी ने 2012 में एक जनहित याचिका दायर की जिसमें निजता और समानता के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की बुनियाद पर आधार को चुनौती दी गई।
इस केस में ही इससे जुड़ी 20 से ज्यादा और याचिकाओं को समाहित कर सुनवाई शुरू की गई। 7 जुलाई, 2017 को तीन जजों की पीठ ने कहा कि यह मामले की सुनवाई बड़ी पीठ करेगी। 12 जुलाई को इसके लिए पांच जजों की पीठ गठित की गई, लेकिन निजता का मामला नौ जजों की संविधान पीठ को भेजे जाने के बाद आधार पर सुनवाई रुकी हुई थी।
Read Also: 31 अगस्त के बाद आधार से पैन नहीं हो सकेगा लिंक, अपनाए ये आसान सा तरीका
कुछ प्रमुख योजनाएं जिनमें आधार अनिवार्य
- एलपीजी सब्सिडी
- मनरेगा
- फसल बीमा योजना
- जनधन योजना
- उर्वरक सब्सिडी
- सरकारी दुकान से राशन
- स्कॉलरशिप के लिए
- जननी सुरक्षा योजना
- मातृत्व लाभ योजना
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
- गृह कल्याण केंद्र योजना
- घर बनाने के लिए सब्सिडी
- मिड डे मील योजना
- पोषक आहार कार्यक्रम
- वृद्धावस्था पेंशन
केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट को आश्वास्त कर चुकी है कि आधार नहीं होने पर फिलहाल किसी भी व्यक्ति भी लाभकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। आधार न होने की स्थिति में लोगों को पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि में से कोई एक पहचान प्रस्तुत करना होगा।
किसने दायर की याचिका
कर्नाटक हाईकोर्ट के 91 वर्षीय रिटायर्ड जज के एस पुत्तस्वामी ने 2012 में एक जनहित याचिका दायर की जिसमें निजता और समानता के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की बुनियाद पर आधार को चुनौती दी गई।
इस केस में ही इससे जुड़ी 20 से ज्यादा और याचिकाओं को समाहित कर सुनवाई शुरू की गई। 7 जुलाई, 2017 को तीन जजों की पीठ ने कहा कि यह मामले की सुनवाई बड़ी पीठ करेगी। 12 जुलाई को इसके लिए पांच जजों की पीठ गठित की गई, लेकिन निजता का मामला नौ जजों की संविधान पीठ को भेजे जाने के बाद आधार पर सुनवाई रुकी हुई थी।
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कुछ प्रमुख योजनाएं जिनमें आधार अनिवार्य
- एलपीजी सब्सिडी
- मनरेगा
- फसल बीमा योजना
- जनधन योजना
- उर्वरक सब्सिडी
- सरकारी दुकान से राशन
- स्कॉलरशिप के लिए
- जननी सुरक्षा योजना
- मातृत्व लाभ योजना
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
- गृह कल्याण केंद्र योजना
- घर बनाने के लिए सब्सिडी
- मिड डे मील योजना
- पोषक आहार कार्यक्रम
- वृद्धावस्था पेंशन