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Wangchuk: 'अलोकतांत्रिक प्रक्रिया की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं', वांगचुक की हिरासत रद्द होने पर बोले थरूर

Sat, 14 Mar 2026 03:36 PM IST
Nitin Gautam वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Sat, 14 Mar 2026 03:36 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की एनएसए कानून के तहत हिरासत रद्द करने का फैसला किया है। इस पर विभिन्न राजनीतिक लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एनएसए कानून के प्रावधानों की आलोचना की और इसे औपनिवेशिक काल की अलोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया। 

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centre revoked nsa from sonam wangchuk shashi tharoor political reactions
शशि थरूर, सांसद कांग्रेस - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और सुप्रीम कोर्ट से बिना मुकदमे के हिरासत की अधिकतम अवधि को लेकर मानदंड तय करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में सोनम वांगचुक ने बिना मुकदमे के अनिश्चितकालीन हिरासत अवधि की आलोचना की और इसे औपनिवेशिक युग की अलोकतांत्रिक प्रथा बताया। 
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थरूर ने एनएसए कानून की आलोचना की
शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा, 'मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द कर दी है, लेकिन 169 दिन का समय बहुत लंबा लगता है। सर्वोच्च न्यायालय को बिना मुकदमे के अधिकतम हिरासत की अवधि के लिए सख्त मानदंड बनाने की जरूरत है। अनिश्चितकालीन हिरासत औपनिवेशिक काल से चली आ रही एक अलोकतांत्रिक प्रथा है। एक परिपक्व लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं।'
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गृह मंत्रालय की सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द करने का फैसला किया
गृह मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत की जा सके। इसी उद्देश्य से वांगचुक की हिरासत रद्द करने का फैसला किया है। 


गृह मंत्रालय ने कहा, सरकार लद्दाख के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है। 24 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और 45 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। जिसके बाद 26 सितंबर को एनएसए कानून के तहत सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। 

लद्दाख के उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई कि उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोनम वांगचुक की हिरासत समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार का एक सकारात्मक कदम है, जो लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने में मदद करेगा।

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