फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Centre Planning to end human animal conflict, provide food and grass in forest

अब लोगों के बीच नहीं आएंगे शेर, गैंडे और हाथी, सरकार जंगल में ही देगी उन्हें 'दाना-पानी'

Fri, 20 Sep 2019 06:45 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 Sep 2019 06:45 PM IST
विज्ञापन
Centre Planning to end human animal conflict, provide food and grass in forest
रॉयल बंगाल टाइगर - फोटो : Twitter
अभी तक आप ऐसी खबरें देखते या सुनते आए हैं कि फलां इलाके में शेर आ गया। चारों तरफ हड़कंप मच गया। कहीं पर हाथी ने लोगों को दौड़ा दिया, तो कहीं गैंडे आम जनमानस के बीच जाकर भय का माहौल बना रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। भविष्य में मानव और जानवरों का संघर्ष टालने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक कार्यक्रम में यह दावा किया है। उन्होंने कहा, इन जानवरों को जो चाहिए, वो उन्हें वहीं पर दे देंगे। जब वे खुश रहेंगे तो जंगल से बाहर आकर लोगों को नहीं दौड़ाएंगे।
विज्ञापन

2967 बाघ, 3,584 गैंडे और 30 हजार हाथी

गुरुवार को डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित श्रीराम वेदिरे की लिखी किताब 'ए डिस्टिंक्टिव वाटर मैनेजमेंट स्टोरी-दा राजस्थान वे' के विमोचन अवसर प्रकाश जावड़ेकर ने यह बात कही है। उन्होंने कहा, हमारे देश में करीब 2967 बाघ हैं, 3,584 गैंडे और 30 हजार हाथी हैं। जिन इलाकों में ये जानवर रहते हैं, उनके आसपास के लोगों की यह शिकायत रहती थी कि ये जानवर हमारे घरों के आसपास आ जाते हैं और घरों पर हमला कर देते हैं। किसानों का कहना था कि ये जानवर फसलों को तबाह करते ही हैं, साथ ही लोगों की जान पर भी बन आती है।

विज्ञापन

जंगल में  ही मुहैया कराएंगे घास और पानी

जावड़ेकर ने बताया कि मैंने कई किसानों से बातचीत की। किसानों ने ही इसका हल भी बता दिया। वे बोले, मंत्री जी आप केवल एक काम कर दे,जहां पर ये जानवर रहते हैं, वहां पानी और घास या अन्य वनस्पति जो इन्हें पसंद है, वह उगवा दें। इसके बाद देखना कि ये जानवर कभी भी गांव या शहर की ओर नहीं आएंगे। बतौर जावड़ेकर, किसानों ने पते की बात कही। जानवर तभी तो बाहर आता है जब उन्हें अपने क्षेत्र में पानी या खाने पीने को कुछ नहीं मिलता।

विज्ञापन
विज्ञापन

50 हजार करोड़ रुपये की राशि वितरित

इसके बाद हमारे मंत्रालय ने योजना बनाई कि इन जानवरों को वहीं पर ही सब कुछ मिलेगा। जंगल में पानी पहुंचाने, घास या दूसरी वनस्पति उगाने की एक विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए विभिन्न राज्यों को 50 हजार करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा रही है। जो अंतिम रिपोर्ट तैयार हुई, उसके लिए देशभर से अफसरों को बुलाया गया था। सभी राज्य वॉटर फीडर ऑग्मेंटेशन योजना पर उक्त राशि खर्च करेंगे। उन्होंने कहा, जंगलों में पानी पहुंचाना या स्थाई वॉटर बॉडी का निर्माण करना मुश्किल नहीं है, क्योंकि देश की 80 फीसदी नदियां जंगलों से होकर बहती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed