प्रमोशन की गुहार: लाखों मुलाजिमों की पदोन्नति तय करने वाले केंद्रीय सचिवालय के 20,000 कर्मियों को खुद नहीं मिल रही प्रोन्नति
केंद्रीय सचिवालय फोरम का कहना है, कर्मियों को पदोन्नति न मिलने के कारण उनमें भारी रोष व्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 10 सालों से लंबित पदोन्नति आरक्षण मामले में 10 अगस्त को दो जजों की बैंच के समक्ष सुनवाई तय की थी। इस मामले में सुनवाई को 14 सितंबर के लिए टाल दिया गया...
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केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत लाखों मुलाजिमों की पदोन्नति तय करने वाले 'केंद्रीय सचिवालय' के लगभग बीस हजार कर्मियों को खुद पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। यह मामला दस वर्षों से लंबित है। अनेक कर्मचारी तो बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय में दो जजों की बैंच के समक्ष 10 अगस्त को उक्त मामले में सुनवाई होनी थी, लेकिन उसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब इस केस की सुनवाई 14 सितंबर को होगी। खास बात है कि 50 फीसदी खाली पड़े पदों को पदोन्नति के जरिए नहीं भरा गया है। यानी कर्मियों को एडहॉक पदोन्नति भी नहीं दी गई। इसके अलावा 80 फीसदी एडहॉक प्रमोशन वाले पदों को नियमित नहीं किया गया है।
केंद्रीय सचिवालय फोरम का कहना है, कर्मियों को पदोन्नति न मिलने के कारण उनमें भारी रोष व्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 10 सालों से लंबित पदोन्नति आरक्षण मामले में 10 अगस्त को दो जजों की बैंच के समक्ष सुनवाई तय की थी। इस मामले में सुनवाई को 14 सितंबर के लिए टाल दिया गया। केंद्रीय सचिवालय फोरम के महासचिव मनमोहन वर्मा के अनुसार, सरकार ने हमारे लिए प्रमोशन का रास्ता बहुत कठिन बना दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2018 में दिए गए आदेशों के तहत मौजूदा वरिष्ठता सूची के आधार पर अगले आदेशों तक सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा रही है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार जो कि नोडल भूमिका में नीति निर्माण और देश के प्रहरी के रूप में कार्य करता है, ने भी अपने कार्यालय ज्ञापन सं.36012/11/2016- स्थापना (Res-I) {Pt-II} दिनांक 15 जून, 2018 को सभी संवर्गों को निर्देशित किया था कि वे मौजूदा वरिष्ठता सूची के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित होने वाले आगे के आदेशों तक पदोन्नति कर सकते हैं। साथ ही इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामले सभी मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा 'डीओपीटी' की सलाह से निपटाए जा रहे हैं। मनमोहन वर्मा ने बताया, सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत पदोन्नति दी जा रही है। डीओपीटी द्वारा भी इस बाबत जरूरी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यहां पर विशेष बात ये है कि डीओपीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दूसरे मंत्रालयों एवं विभागों में माना जा रहा है, लेकिन केंद्रीय सचिवालय में कार्य कर रहे कर्मचारियों की पदोन्नति पर डीओपीटी ने रोक लगा रखी है। हैरानी की बात है कि डीओपीटी अन्य सभी मंत्रालयों एवं विभागों के अन्तर्गत आने वाले सभी संवर्गो में लगातार पदोन्नति कर रहा है। केंद्रीय सचिवालय में कार्यरत योग्य अधिकारियों के प्रमोशन न होने के कारण उनके करियर पर विपरित असर पड़ रहा है।
केंद्रीय सचिवालय फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति के मामले में बरते जा रहे इस भेदभाव का असर उनके करियर पर पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अपनी बेहतर सेवाएं देने के बावजूद बिना किसी प्रमोशन के सेवानिवृत होता है तो उसे ही नहीं, बल्कि उसके साथ काम करने वाले दूसरे कर्मियों को भी धक्का लगता है। ये सभी वे कर्मचारी हैं, जिन्होंने हर तरह की मुसीबत में केंद्र सरकार का साथ दिया है। देश के लिए नीति निर्माण और दूसरे अहम फैसलों को लागू करने में केंद्रीय सचिवालय के कर्मियों का अहम योगदान रहा है। अब लंबे समय से सचिवालय में पदोन्नति बंद है। इस स्थिति के कारण कर्मियों में एक निराशा का माहौल बन गया है। पिछले पांच साल के दौरान केंद्रीय सचिवालय में प्रमोशन न होने की वजह से कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जारी भर्ती की संख्या में भी वर्ष दर वर्ष कमी आ रही है। पदोन्नति के लिए जूझ रहे बीस हजार कर्मियों में चार कैडर, केंद्रीय सचिवालय सेवा, केंद्रीय लिपिक सेवा, केंद्रीय स्टेनाग्राफर सेवा और केंद्रीय राजभाषा सेवा, शामिल हैं।