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8th CPC: गैर-अंशदायी पेंशन की अनफंडेड कॉस्ट, ये क्यों है पूर्व सैनिकों सहित लाखों पेंशनरों का अपमान
सार
एआईटीयूसी महासचिव अमरजीत कौर का कहना था, सरकार द्वारा वेतन आयोग के गठन के लिए जारी लगभग सभी संदर्भ की शर्तें केवल यही कहती हैं कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को आर्थिक स्थितियों, वित्तीय विवेक, विकासात्मक व्यय एवं कल्याणकारी उपायों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने और सबसे बुरी बात गैर अंशदायी पेंशन योजना की बिना वित्तपोषित लागत के बारे में ध्यान रखना चाहिए।
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8वां वेतन आयोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों को स्वीकृति दी है। आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (अंशकालिक) और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। अपने गठन की तिथि से 18 महीनों के भीतर यह आयोग, अपनी सिफारिशें देगा। इसके बाद से केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के महासचिव अमरजीत कौर ने कहा, आठवें वेतन आयोग को दिए गए संदर्भ की शर्तें इतनी कठोर हैं कि 8वें सीपीसी पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में आयोग के सामने बहुत सारी मजबूरियां पैदा होंगी। दूसरी तरफ ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी (जेसीएम) के वरिष्ठ सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों (टीओआर) में "गैर-अंशदायी पेंशन योजना की अवित्तपोषित लागत" शब्द के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों सहित लाखों पेंशनभोगियों का "अपमान" बताया, जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन, राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया।
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एआईटीयूसी महासचिव अमरजीत कौर का कहना था, सरकार द्वारा वेतन आयोग के गठन के लिए जारी लगभग सभी संदर्भ की शर्तें केवल यही कहती हैं कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को आर्थिक स्थितियों, वित्तीय विवेक, विकासात्मक व्यय एवं कल्याणकारी उपायों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने और सबसे बुरी बात गैर अंशदायी पेंशन योजना की बिना वित्तपोषित लागत के बारे में ध्यान रखना चाहिए। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वरिष्ठ नेता और अनुभवी ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि सी. श्रीकुमार ने तर्क दिया कि इस तरह की शब्दावली 'गैर-अंशदायी पेंशन योजना की अवित्तपोषित लागत', पेंशनभोगियों को सरकार के वित्त पर बोझ के रूप में गलत तरीके से पेश करती है। ऐसा कर सरकार जनता को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि पेंशन का भुगतान करदाताओं की कीमत पर किया जाता है। श्रीकुमार ने ज़ोर देकर कहा, इस देश का निर्माण करने वाले वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सम्मान को इस तरह से कम नहीं किया जा सकता।
श्रीकुमार ने कहा कि छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोगों को पेंशन की संरचना और संशोधन की जांच करने का स्पष्ट अधिकार था। छठे वेतन आयोग ने 1 जनवरी, 2004 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के लिए पेंशन, ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन से संबंधित सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया। सातवें वेतन आयोग में नई पेंशन योजना (एनपीएस) के कार्यान्वयन की तिथि से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था। इसके विपरीत, आठवें वेतन आयोग में 'अनफंडेड नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन' के संदर्भ में की गई शब्दावली ने पेंशनभोगियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसके कारण भारत पेंशनभोगी समाज (बीपीएस) जैसे संगठनों ने पेंशन संशोधन के किसी भी स्पष्ट संदर्भ को न दिए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
श्रीकुमार ने कहा कि छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोगों को पेंशन की संरचना और संशोधन की जांच करने का स्पष्ट अधिकार था। छठे वेतन आयोग ने 1 जनवरी, 2004 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के लिए पेंशन, ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन से संबंधित सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया। सातवें वेतन आयोग में नई पेंशन योजना (एनपीएस) के कार्यान्वयन की तिथि से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था। इसके विपरीत, आठवें वेतन आयोग में 'अनफंडेड नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन' के संदर्भ में की गई शब्दावली ने पेंशनभोगियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसके कारण भारत पेंशनभोगी समाज (बीपीएस) जैसे संगठनों ने पेंशन संशोधन के किसी भी स्पष्ट संदर्भ को न दिए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
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बीपीएस ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर 2004 से पहले और 2004 के बाद के सेवानिवृत्त कर्मचारियों, दोनों के लिए पेंशन और महंगाई राहत संशोधन के प्रावधानों को शामिल करने का आग्रह किया है। इसी तरह एआईटीयूसी और सीआईटीयू सहित ट्रेड यूनियनों ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए बयान जारी किए हैं। श्रीकुमार ने याद दिलाया कि जब अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) योजना को सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के तहत वैधानिक पेंशन प्रणाली से प्रतिस्थापित किया गया था, तो सरकार से कर्मचारियों की ओर से अंशदान करके एक पेंशन निधि बनाने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, ऐसा कोई कोष कभी स्थापित नहीं किया गया, जिसके कारण पेंशन का भुगतान भारत की संचित निधि से किया जाने लगा। उन्होंने ऐतिहासिक 'डीएस नाकारा' मामले का हवाला दिया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था, पेंशन पूर्व सेवा के माध्यम से अर्जित एक अधिकार है, दान नहीं। सभी पेंशनभोगी एक ही वर्ग का गठन करते हैं। सेवानिवृत्ति की तिथि मनमाने भेदभाव का कारण नहीं बन सकती। नियोक्ता के विवेक पर, पेंशन नहीं रोकी जा सकती। वित्तीय बाधाएं, पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव को उचित नहीं ठहरा सकतीं। यह भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।
श्रीकुमार ने सरकार से आग्रह किया है, वह आठवें वेतन आयोग को निर्देश दे कि वह 1 जनवरी, 2026 से सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए, चाहे उनकी सेवानिवृत्ति तिथि कुछ भी हो, पेंशन संशोधन और संबंधित लाभों की स्पष्ट रूप से सिफारिश करे। उन्होंने नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त करने और लगभग 25 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के अंतर्गत लाने की मांग भी दोहराई। श्रीकुमार ने कहा, "सरकार को उन 69 लाख पेंशनभोगियों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए, जिन्होंने अपना जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया है। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दी जाने वाली राहत को दायित्व नहीं समझा जाना चाहिए, जबकि कॉर्पोरेट्स को दी जाने वाली रियायतें बेरोकटोक जारी रहती हैं।
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) की महासचिव अमरजीत कौर ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) से आग्रह किया कि न्यूनतम वेतन मौजूदा तीन-इकाई मानदंड के बजाय पांच-सदस्यीय परिवार की आवश्यकताओं के आधार पर तय किया जाए। बच्चों की अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, इसलिए वेतन गणना में पांच-इकाई परिवार को शामिल किया जाना चाहिए। मौजूदा पेंशनभोगियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और उनकी पेंशन को 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी रूप से कार्यरत कर्मचारियों के समान संशोधित किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, एटक ने यह मांग भी की है कि 8वें वेतन आयोग द्वारा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर्गत कार्यरत 24 लाख से अधिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को 1 जनवरी, 2004 से पूर्वव्यापी प्रभाव से बहाल करने पर विचार किया जाए। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए उचित वेतन निर्धारण, पेंशन समानता, सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक वर्ग के लिए आर्थिक न्याय और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पहलू हैं।
इसके अतिरिक्त, एटक ने यह मांग भी की है कि 8वें वेतन आयोग द्वारा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर्गत कार्यरत 24 लाख से अधिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को 1 जनवरी, 2004 से पूर्वव्यापी प्रभाव से बहाल करने पर विचार किया जाए। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए उचित वेतन निर्धारण, पेंशन समानता, सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक वर्ग के लिए आर्थिक न्याय और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पहलू हैं।