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UCC: समान नागरिक संहिता पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, कहा- कानून बनाना संसद का काम
Tue, 18 Oct 2022 07:50 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 18 Oct 2022 07:50 PM IST
सार
वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, विवाह, तलाक, रखरखाव और गुजारा भत्ता को विनयमित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता की मांग की गई थी।
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Uniform Civil Code
- फोटो : Istock
विस्तार
केंद्र सरकार संसद को समान नागरिक संहिता पर कोई कानून बनाने या उसे लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता है। कानून और न्याय मंत्रालय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह बात कही।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, विवाह, तलाक, रखरखाव और गुजारा भत्ता को विनयमित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता की मांग की गई थी। केंद्र सरकार ने इसी याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया।
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केंद्र ने याचिका को खारिज करने की भी मांग की। सरकार ने कहा, यह कानून की तय स्थिति है, जैसाकि इस कोर्ट द्वारा निर्णयों की श्रेणी में रखा गया है कि हमारी संवैधानिक योजना के तहत संसद कानून बनाने के लिए संप्रभु शक्ति का इस्तेमाल करती है और इसमें कोई बाहरी शक्ति या प्राधिकरण हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
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कानून और न्याय मंत्रालय ने आगे कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 एक निर्देशक सिद्धांत है, जिसमें राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करने की आवश्यकता है।
मंत्रालय ने कहा कि अनुच्छेद 44 संविधान की प्रस्तावना में निहित धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य को मजबूत करने के लिए है। यह प्रावधान, समुदायों को उन मामलों पर मंच साझा कर भारत के एकीकरण को प्रभावित करने के लिए प्रदान किया गया है, जो वर्तमान में विविध व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित हैं।
कानून मंत्रालय ने कोर्ट को यह भी बताया कि वह इस मामले से अवगत है और 21वें विधि आयोग ने कई हितधारकों से अभ्यावेदन आमंत्रित करके इस मुद्दे की विस्तृत जांच की। हालांकि, उक्त आयोग का कार्यकाल 2018 में समाप्त होने के बाद से मामले को पहले रखा जाएगा।