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OPS in CAPF/SSC GD 2018: कोर्ट के इन दो फैसलों पर मौन है केंद्र सरकार, पुरानी पेंशन और नियुक्ति पत्र का इंतजार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 10 Feb 2023 07:54 PM IST
सार

OPS in CAPF/SSC GD 2018: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी को दिए अपने एक एतिहासिक फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है। इन बलों में लागू 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही गई है...

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Central Government is silent on OPS in CAPF and SSC GD 2018 decisions of delhi high court
Delhi High Court: OPS in CAPF/SSC GD 2018 - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए दो फैसलों पर मौन है। सरकार की ओर से अभी तक न तो केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन स्कीम में शामिल करने की बात कही गई है और न ही एसएससी जीडी-2018 के आवेदकों की नियुक्ति को लेकर कोई आदेश जारी हुआ है। एसएससी जीडी के फैसले का पालन करने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया गया था। चूंकि यह फैसला दिसंबर में सुनाया गया था, इसलिए अब तय अवधि भी निकल गई है। दूसरी ओर, सीएपीएफ में पुरानी पेंशन लागू करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को आठ सप्ताह का समय दिया है। यह फैसला 11 जनवरी को सुनाया गया था। अभी तक दोनों ही केसों में केंद्र सरकार ने अपने निर्णय की जानकारी नहीं दी है।

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14 फरवरी को जंतर-मंतर पर होगी रैली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी को दिए अपने एक एतिहासिक फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है। इन बलों में लागू 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे। केंद्र ने अभी तक इस बाबत कोई निर्णय नहीं लिया है। हालांकि कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार को चेताते हुए कहा है कि अगर 'सीएपीएफ' में 'पुरानी पेंशन' बहाल नहीं होती है, तो इस बार 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार होली नहीं मनाएंगे। एसोसिएशन ने यह भी कह दिया है कि केंद्र सरकार, दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अगर सुप्रीम कोर्ट में जाती है, तो यह जवानों के बलिदान का अपमान होगा। एसोसिएशन, इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगी। इन बलों में पुरानी पेंशन लागू कराने और दूसरी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए 14 फरवरी को जंतर-मंतर पर रैली आयोजित की जाएगी।

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संसद में उठ चुका है ओपीएस का मामला

विपक्षी दलों के नेता इस मामले को संसद में उठा रहे हैं। हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उनका कहना था कि सरकार को इन बलों में अविलंब ओपीएस लागू करना चाहिए। लोकसभा सांसद असदुद्दीन औवेसी ने भी सोमवार को पुरानी पेंशन को लेकर सदन में सवाल पूछा था। सांसद औवेसी के सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ. भागवत कराड ने कहा, इन बलों में एनपीएस लागू है। उसमें पेंशन स्कीम के सभी लाभ बताए गए हैं। पहली जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए सभी कर्मियों पर एनपीएस पर लागू होता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 जनवरी को इस बाबत फैसला सुनाया है कि सीएपीएफ में पुरानी पेंशन लागू की जाए। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत पॉलिसी मैटर है। गुरुवार को पीएम मोदी ने राज्यसभा में पेंशन स्कीम को आने वाली पीढ़ियों पर भार बताया था। उन्होंने कहा था, तात्कालिक फायदे के लिए कुछ राज्य ऐसा पाप न करें।

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अभ्यर्थियों का भला होगा और सरकार का खर्च बचेगा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एसएससी जीडी-2018 और एसएसबी भर्ती 2016, इन दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई कर 21 दिसंबर को फैसला सुनाया था। फैसला लागू करने के लिए सरकार को चार सप्ताह का समय दिया गया। इस फैसले का असर जिन अभ्यर्थियों पर होना है, वे सटीक सूचना लेने के लिए भटक रहे हैं। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि इस फैसले को किस तरह से लागू किया जाएगा। सरकार, किन अभ्यर्थियों को मौका देगी। अदालत ने अपने फैसले में 13 जून 2000 को जारी डीओपीटी के एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा था, सरकार के पास जो वैकेंसी बची हैं, उनके भरने से अभ्यर्थियों का भला होगा। इससे सरकार का खर्च बचेगा, क्योंकि उसे दोबारा से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करनी पड़ेगी। एसएसबी व सीएपीएफ में जो रिक्त पद हैं, उन्हें भर्ती प्रक्रिया में पहले से शामिल रहे अभ्यर्थियों के माध्यम से भरा जाए। इसमें मैरिट, श्रेणी और स्टेट डोमिसाइल देखा जाए। यह भी कहा गया कि अभ्यर्थियों को वरिष्ठता का लाभ भी देना होगा, मगर उन्हें पिछले वेतन का लाभ नहीं मिलेगा।  

खाली पदों को रिजर्व लिस्ट से भरा जाना चाहिए

इस केस के फैसले में डीओपीटी का कार्यालय ज्ञापन मुख्य आधार बना। सरकारी पक्ष द्वारा कहा गया कि यह नियम पदोन्नति पर लागू होता है, नई नियुक्तियों पर नहीं। किन्हीं कारणों से जो वैकेंसी नहीं भरी जा सकी, सरकार ने उसका ध्यान रखा है। अगले वर्ष यानी के 2021 के एग्जाम में उन्हें एडजस्ट करने की बात कही गई। 2018 में निकली भर्ती, जिसकी प्रक्रिया चौथे साल में पूरी हुई थी, उसमें 55912 आवेदकों का चयन हुआ। कुछ पद कोर्ट के आदेश पर खाली रखे गए। लगभग चार हजार पद खाली रहे, क्योंकि योग्य उम्मीदवार नहीं मिले थे। डीओपीटी का कार्यालय ज्ञापन कहता है कि खाली पदों को वेटिंग लिस्ट से ही भरना है। इस मामले में वेटिंग लिस्ट/रिजर्व लिस्ट नहीं नहीं रखी गई। अभ्यर्थियों के वकील ने कहा, डीओपीटी के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, खाली पदों को रिजर्व लिस्ट से ही भरा जाना चाहिए। अदालत ने भी इस बात को माना था।

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