अन्य देशों के राजनयिकों को भी भारत सरकार कराएगी जम्मू-कश्मीर का दौरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली ने यह बताने का प्रयास किया है कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद का खतरा बना है, लेकिन राज्य में अनुच्छेद 370 हटाने, राज्य की वैधानिक स्थिति में बदलाव के बाद पांच अगस्त से अब तक भारत और जम्मू-कश्मीर राज्य प्रशासन ने क्या किया है? साथ ही, कितनी तेजी से वहां के हालात को सामान्य बनाया और अब वहां के लोगों को इससे कोई परेशानी नहीं है।
अभी और राजनयिक भी जाएंगे जम्मू-कश्मीर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार दो दिवसीय दौरे की उपलब्धियों से पूरी संतुष्टि जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दौरा बेहद सफल रहा है। राजनयिकों ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से आए सिविल सोसाइटी के लोगों, स्थानीय नागरिकों से जानकारी ली है। संवाद किया है और उन्हें वहां की स्थिति के बारे में अवगत कराया गया।
इस दौरान राजनयिकों ने सुरक्षा कर्मियों से मिलकर बातें की। विदेश मंत्रालय का कहना है कि राज्य में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इसे राजनयिकों ने भी महसूस किया है।
अन्य देशों के राजनयिकों को भी सरकार कराएगी दौरा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई पहला दौरा नहीं है। अभी यह शुरू हुआ है। राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर से लौटने के बाद इस दौरे का इनपुट सामने आएगा। रवीश कुमार का कहना है कि अभी इस तरह के कुछ और दौरे होंगे। हालांकि अभी यह दौरे छोटे-छोटे राजनयिकों के समूह में ही कराए जाने की योजना है। क्योंकि राज्य में आतंकवाद का खतरा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान से घुसपैठ की संभावना लगातार बनी है।
इसलिए एहतियात के तौर पर राजनयिकों का छोटे-छोटे समूह में ही हो सकता है। रवीश कुमार ने बताया कि यूरोपीय देशों के राजनयिक समेत अन्य देशों के राजनयिक भी वहां जाने के इच्छुक हैं। यूरोपीय देशों के राजनयिक अपने समूह में वहां जाना चाहते हैं। उनकी संख्या भी अधिक है। इसलिए इस समूह में नहीं ले जाए जा सके, लेकिन अगले दौरे में इस पर विचार संभव है।
क्या है पाकिस्तान की चाल?
पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में भारत की कोशिश पच नहीं रही है। भारत ने जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव किया है। वहां से अनुच्छेद 370 को हटाया, राज्य से लद्दाख के क्षेत्र को अलग कर उसे और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है।
भारत की इस पहल के बाद से पाकिस्तान का कहना है कि नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में नागरिकों के मानवीय अधिकारों का दमन कर रही है। वहां के बाशिदों को दवा, संचार, इंटनेट समेत सहूलियतों से वंचित रखा जा रहा है और उनके मानव अधिकारों को छीन लिया गया है।
पाकिस्तान इस दुष्प्रचार के साथ लगातार जम्मू-कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश में लगा है। इसके जवाब में भारत ने हर पाकिस्तान को अपने जवाब, प्रयास से निराश किया है। भारत का कहना है कि उसने यह कदम राज्य के लोगों की बेहतरी, उन्हें देश के विकास, मुख्य धारा से जोड़ने, जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने और आतंकवाद से मुक्ति दिलाने के क्रम में किया है।