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MGNREGA: मनरेगा में श्रमिकों की संख्या गिरने के दावे को केंद्र ने किया खारिज, कहा- यह मांग आधारित योजना है

Sun, 27 Oct 2024 08:56 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 27 Oct 2024 08:56 PM IST
सार

लिबटेक इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मनरेगा में पिछले वर्ष के मुकाबले सक्रिय मजदूरों की संख्या में आठ फीसदी कमी आई है।

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Center rejected the claim of falling number of workers in MNREGA, said- this is a demand based scheme
मनरेगा मजूदर (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI

विस्तार

मनरेगा में श्रमिकों की संख्या कम होने के दावे को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) मांग आधारित योजना है। इसमें नामांकन का लक्ष्य तय नहीं किया जा सकता। हाल ही में लिबटेक इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मनरेगा में पिछले वर्ष के मुकाबले सक्रिय मजदूरों की संख्या में आठ फीसदी कमी आई है।

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39 लाख श्रमिकों के नाम हटाने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया था कि कुल 39 लाख श्रमिकों के नाम हटाए गए। योजना के तहत 84 लाख श्रमिकों के नाम हटाकर 45.4 लाख श्रमिकों के नाम जोड़े गए थे। इसे लेकर मंत्रालय ने कहा कि अभी वित्तीय वर्ष चल रहा है, इसलिए मानव दिवस सृजन का लक्ष्य तय नहीं किया जा सकता। हालांकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार श्रम बजट में संशोधन का प्रस्ताव भेज सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2006-07 से वित्त वर्ष 2013-14 के बीच कुल 1,660 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए। जबकि वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2024-25 तक कुल 2,923 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए।
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रोजगार में आई कमी
लिबटेक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि योजना के तहत रोजगार के अवसरों में भी कमी आई। जो पिछले वर्ष के 184 करोड़ व्यक्ति प्रतिदिन से गिरकर 154 करोड़ पर आ गई। इसके साथ ही केवल 6.7 करोड़ श्रमिकों को आधार भुगतान प्रणाली के तहत मजदूरी दी गई। इस पर मंत्रालय ने कहा कि आधार भुगतान प्रणाली से श्रमिकों के आधार से लिंक बैंक खातों में सीधे मजदूरी का भुगतान किया जाता है। 26 अक्तूबर 2024 तक 13.1 करोड़ सक्रिय श्रमिकों की आधार सीडिंग का काम पूरा हो चुका है। जो कुल सक्रिय श्रमिकों का 99.3 फीसदी है। 
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आधार से लिंक किए जा रहे मजदूरों के बैंक खाते
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि श्रमिकों के खातों में मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। काम की मांग के आधार पर ही मजदूरी दी जाती है। जिन मजदूरों का अब तक आधार बैंक खाते से लिंक नहीं हो सका है, इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है। राज्य सभी बैंकों को जागरूक करें और मनरेगा लाभार्थियों की आधार को लिंक कराएं। 

जॉब कार्ड सत्यापन पर यह दिया जवाब
मंत्रालय ने कहा कि मनरेगा के तहत जॉब कार्ड सत्यापन की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश श्रमिकों के आधार की मदद से यह काम कर रहे हैं। ताकि डुप्लीकेट जॉब कार्ड को हटाया जा सके। जॉब कार्ड को तभी हटाया जा सकता है, जब वह फर्जी हो या काम करने वाला श्रमिक कहीं चला गया हो या फिर उसकी मौत हो गई हो। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान राज्यों ने 1.02 करोड़ जॉब कार्ड हटाए थे। जबकि चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 32.28 लाख जॉब कार्ड हटाए गए हैं। 

जिला स्तर पर उपस्थिति का विकल्प
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मेट के पास स्मार्टफोन न होने पर मनरेगा के तहत काम न होने के दावे को भी नकार दिया। मंत्रालय ने कहा कि उपस्थिति अपलोड न होने की स्थिति में जिला स्तर पर तैनात कार्यक्रम समन्वयक को मैनुअल उपस्थिति दर्ज करने का काम सौंपा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में 20.35 लाख मजदूरों की उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज की गई।


लगातार हो रहा बजट में इजाफा
मंत्रालय ने यह भी कहा कि योजना के तहत बजट में लगातार इजाफा हो रहा है। वित्त वर्ष 2013-14 में 33 हजार करोड़ रुपये बजट का आवंटन योजना के तहत किया गया था। अब वित्त वर्ष 2024-25 में 86,000 करोड़ रुपये बजट का आवंटन किया गया है। वहीं मजदूरी दर में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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