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केंद्र का बयान: जीएम सरसों पर प्रतिबंध लगाना देशहित में नहीं, 50% से ज्यादा खाद्य तेल का करना पड़ता है आयात

Sat, 20 Jan 2024 07:06 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sat, 20 Jan 2024 07:06 AM IST
सार

केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशायल के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2020-21 के दौरान भारत में खाद्य तेलों की कुल मांग 2.46 करोड़ टन की थी। उस साल देश में महज 1.11 करोड़ टन खाद्य तेल ही पैदा किया गया था।

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Center ban GM mustard inappropriate national interest SC said more than 50% has to be imported
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

जीन में बदलाव कर तैयार किए गए (जेनेटिकली मॉडिफाइड या जीएम) सरसों का केंद्र सरकार ने समर्थन किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश में 50 फीसदी से ज्यादा खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है। जीएम सरसों के जरिये आम आदमी को सस्ते और गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही किसानों के आय को बढ़ाया जा सकता है। इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना देश हित में नहीं होगा।

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जस्टिस वीबी नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह वही बता रहे हैं जो देशहित में है।
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जीएम सरसों की खेती के जरिये खाद्य तेल के मामले में आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। पीठ जीएम सरसों की खेती पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें इसके प्रतिकूल प्रभाव की बात कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में देश में सरसों की खेती और उत्पादन में मामूली वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती जनसंख्या के साथ ही खाद्य तेल की मांग भी बढ़ रही है। 2010-11 में देश में 272.2 लाख हेक्टेयर रकबे में तिलहन की खेती होती थी, जो 2022-23 में बढ़कर 302.3 लाख हेक्टेयर हो गई। लेकिन, प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की औसत खपत 1950-60 में 2.9 किलोग्राम प्रति वर्ष से बढ़कर 2022 में 19.50 किलोग्राम प्रति वर्ष हो गई है।
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केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशायल के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2020-21 के दौरान भारत में खाद्य तेलों की कुल मांग 2.46 करोड़ टन की थी। उस साल देश में महज 1.11 करोड़ टन खाद्य तेल ही पैदा किया गया था। इसी तरह साल 2021-22 के दौरान कुल मांग के मुकाबले महज 54 फीसदी यानी 1.34 करोड़ टन ही खाद्य तेल उत्पादित हुए थे। शेष मांग की पूर्ति आयात के जरिये पूरी की गई थी।

मौखिक आश्वासन वापस लिया
सरकार ने नवंबर 2022 में मौखिक रूप से अदालत में आश्वासन दिया था कि जीएम सरसों की खेती को लेकर उसकी तरफ से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन पिछले साल अगस्त में उसने जीएम सरसों की खेती न करने के अपने इस मौखिक आश्वासन को वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया। सरकार इस पर जल्द फैसला चाहती है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।


आयात पर एक लाख करोड़ से ज्यादा खर्च
मेहता ने बताया कि 2021-22 में खाद्य तेलों के आयात पर सरकार को 1.15 लाख करोड़ रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी। उस साल जितने खाद्य तेलों का आयात हुआ था, उसमें से 57 फीसदी पॉम आयल, 22 फीसदी सोयाबीन का तेल और 15 फीसदी सूर्यमुखी तेल का आयात किया गया था। साल 2022-23 में भी 1.55 करोड़ टन या कुल मांग का 55.76 फीसदी हिस्सा आयात के जरिये पूरा किया गया था। इसलिए सरकार चाहती है कि देश में जीएम सरसों बीज के जरिये सरसों का ज्यादा उत्पादन किया जाए।

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