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गांबिया से सबक: देश की दवा फैक्टरियों की जांच शुरू, खराब गुणवत्ता और नकली दवा बनाने वाली फैक्टरियों की पहचान

Wed, 28 Dec 2022 05:45 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 28 Dec 2022 05:45 AM IST
सार

सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की फैक्टरियों पर टीमों की नजर अधिक है।

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CDSCO inspects drugs factory to check for regulatory compliance
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अफ्रीकी देश गांबिया में कफ सिरप से मौतों के बाद और सतर्क हुई केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर देश की दवा फैक्टरियों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। खराब गुणवत्ता या फिर नकली दवा बनाने वाली फैक्टरियों को चिह्नित करने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें निरीक्षण कर रही हैं।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, औषधि नियंत्रण विभाग की टीमों ने दवा फैक्टरियों का निरीक्षण शुरू किया है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की फैक्टरियों पर टीमों की नजर अधिक है।
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स्वास्थ्य मंत्री ने दिए थे निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने हाल ही में एक बैठक के दौरान नकली व खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के उत्पादन पर रोक लगाने और जमीनी हकीकत जानने के लिए अधिकारियों को निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। निर्देश मिलने के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के साथ मिलकर चिह्नित दवा निर्माण इकाइयों का संयुक्त निरीक्षण करना शुरू कर दिया है।
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कफ सीरप से हुई थीं 70 लोगों की मौत
विशेषज्ञों का कहना है कि गांबिया घटना के बाद बेहतर गुणवत्ता वाली दवाओं पर जोर देना बहुत जरूरी हो गया है, क्योंकि भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है। दरअसल, गांबिया में कफ सीरप की वजह से 70 लोगों की मौत हुई थी। कफ सीरप निर्माता कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के बाद मेडेन कंपनी को क्लीनचिट दे दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का फार्मास्यूटिकल्स निर्यात पिछले एक दशक में दोगुने से अधिक पहुंचा है। ऐसे में जरूरी है कि भारतीय कंपनियों पर बेहतर दवाओं के उत्पादन को लेकर नजर रखी जाए।


कार्रवाई के लिए समिति
अधिकारी के मुताबिक, मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार पूरे देश में संयुक्त निरीक्षण किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, निरीक्षण, रिपोर्टिंग और बाद की कार्रवाई को लेकर सीडीएससीओ (मुख्यालय) में दो संयुक्त औषधि नियंत्रकों की एक समिति भी गठित की है, ताकि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम 1940 और उसके नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्ती  से निपटा जा सके।

  • वहीं, मंत्रालय ने गैर-मानक, मिलावटी या नकली दवाएं बनाने वाली किसी कंपनी का नाम नहीं लिया है।
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