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हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थानों और अड्डों के लिए मची है होड़ : जनरल रावत

Sat, 12 Dec 2020 02:25 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 12 Dec 2020 02:25 AM IST
सार

  • सीडीएस ने कहा, हिंद महासागर हमारी नौसेना के काफी अहम, यहां चीन लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा 

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cds rawat says in military technology must be means of deterrence not source of destruction 120 warships
सीडीएस जनरल बिपिन रावत (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न मिशनों के लिए बाहरी देशों के 120 से अधिक युद्धपोत तैनात हैं। क्षेत्र के कई देशों के बीच विवाद के बावजूद क्षेत्र में अब तक शांति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थानों और अड्डों के लिए होड़ मची हुई है तथा आने वाले समय में इसमें और तेजी आने वाली है। उनका यह बयान हाल के वर्षों में दक्षिणी चीन सागर समेत अन्य क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के परिदृश्य में देखा जा रहा है। 

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एक ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में वैश्विक दबदबे के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा विषय पर उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में अधिक से अधिक देशों की बढ़ती सक्रियता इसके रणनीतिक महत्व को दिखाता है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर भारतीय नौसेना के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि इस क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हित हैं और चीन लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। वैश्विक ताकत बनने के लिए भारत की आकांक्षाओं का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि मुश्किलें पैदा करने वाले पड़ोसियों और क्षेत्र में बढ़ती होड़ के बावजूद भारत को इस दिशा में काम करना होगा।
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उन्होंने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति बढ़ने के साथ-साथ इस क्षेत्र को प्रभावित करने की क्षमता ने दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के ज्यादातर देश अत्याधुनिक संपर्क साधनों और समुद्री संसाधनों का दोहन कर अधिक से अधिक लाभ पाने की जुगत में है और इसके लिए आधारभूत संरचनाओं का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्रीय और बाहरी ताकतें वैश्विक राजनीति को संतुलित बनाए रखने और उसे अपने प्रभाव में लेने के लिए इन देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में निवेश कर रही हैं। 
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सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा भारत
सीडीएस ने कहा कि भारत आज सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि उन्होंने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ विवाद का जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होेंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई संदर्भों में पड़ोसी देश का परोक्ष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने रक्षा बलों की क्षमता निर्माण और विकास के लिए दीर्घावधि योजना बनाने की आवश्यकता है। मजबूत भारत के निर्माण की तलाश में हमें एक शांतिपूर्ण और स्थिर सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों के लिए भूमि और सीमाओं की सुरक्षा एक अहम चिंता है।


इसलिए, खतरों और चुनौतियों के बारे में सही आकलन के आधार पर हमारे सशस्त्र बलों द्वारा किए जाने वाले आधुनिकीकरण कार्यक्रमों को सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत संरचनाओं को विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत (जेएआई), भारत-आसियान और इसी तरह के मौजूदा तंत्रों का सही संतुलन रखने के लिए द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्र बनाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी समस्या निवारण का साधन बननी चाहिए, न कि विनाश का स्रोत। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी से मानव को लाभ होना चाहिए और इसका उपयोग मौजूदा सिस्टम को नष्ट करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
 

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