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दिल्ली में सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा के लिए 50 रुपये ही देंगे एससी-एसटी छात्र: सीबीएसई
Tue, 13 Aug 2019 09:20 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 13 Aug 2019 09:20 PM IST
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सीबीएसई
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सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा के शुल्क के तौर पर दिल्ली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र पहले की तरह ही 50 रुपये ही देंगे और बाकी बढ़ी हुई राशि दिल्ली सरकार देगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने मंगलवार को यह घोषणा की।
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सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशों पर एससी और एसटी समुदाय के छात्रों को राहत देने के लिए फैसला किया गया। सीबीएसई ने हाल ही में सभी श्रेणियों के लिए बोर्ड परीक्षा के शुल्क में वृद्धि की घोषणा की।
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त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि बोर्ड ने स्कूलों से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एससी और एसटी छात्रों से 50 रुपये ही लेने की प्रक्रिया को बहाल करने का फैसला किया है।
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पिछले सप्ताह दिल्ली में 10वीं और 12वीं के सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए शुल्क पांच विषयों के लिए 750 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है। दिल्ली में एससी और एसटी छात्रों के लिए शुल्क बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया।
सीबीएसई ने बताई वजह
सीबीएसई के अधिकारियों के अनुसार 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं को आयोजित करने में 200 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान के कारण बोर्ड को फीस में वृद्धि के लिए मजबूर होना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं के जल्दी परिणाम के साथ ही परीक्षाओं को ‘लीक प्रूफ’ बनाने तथा त्रुटि-रहित मूल्यांकन के लिए उठाए गए कदमों से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
अधिकारियों ने कहा कि जेईई और एनईईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी नवगठित राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को दिए जाने के कारण भी उस पर वित्तीय संकट पैदा हुआ है।सीबीएसई ने पिछले हफ्ते 10वीं और 12वीं के लिए परीक्षा शुल्क, कक्षा 9 और 11 के लिए पंजीकरण शुल्क आदि में वृद्धि की घोषणा की थी।
बोर्ड के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि आत्मनिर्भरता के साथ ही परीक्षा, मूल्यांकन की गुणवत्ता तथा करीब 200 करोड़ रुपये की वित्तीय कमी को दूर करने के लिए शुल्क में वृद्धि की आवश्यकता है।त्रिपाठी के अनुसार सीबीएसई कक्षा 10 और 12 के लिए परीक्षाएं आयोजित करने पर सालाना करीब 500 करोड़ रुपये खर्च करता है।
उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की कमी रही है। हालांकि, जेईई और एनईईटी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करके उस घाटे को पूरा कर लिया जाता था। लेकिन इन्हें अब मानव संसाधन मंत्रालय की एनटीए को सौंप दिया गया है।
त्रिपाठी ने कहा, इसलिए, फीस बढ़ाने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है। हम परीक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते। बोर्ड के सचिव ने कहा कि सीबीएसई एक स्वायत्त और स्व-वित्तपोषित निकाय है और इस कदम से अब यह न नफा और न नुकसान की स्थिति में आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि फीस बढ़ाने का फैसला सीबीएसई के संचालन निकाय द्वारा सभी कारकों पर विचार करने के बाद लिया गया और फीस में वृद्धि पांच साल के अंतराल के बाद की गयी है।