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सीबीएसई पेपर लीक केस: प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड व वाटर मार्क का करें इस्तेमाल, कमेटी ने दिए सुझाव

Sat, 16 Jun 2018 09:41 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 16 Jun 2018 09:41 AM IST
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CBSE paper leak case: Use QR code and water mark in the question paper says panel of CBSE

 केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को पेपर लीक से बचने के लिए प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड व वाटर मार्क का प्रयोग करना चाहिए। कोड की मदद से आसानी से पहचान हो जाएगी कि किस सेंटर से प्रश्न पत्र लीक हुआ है। 

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केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने सुझाव दिया है कि बोर्ड को दो चरणों (जनवरी-फरवरी और मार्च-अप्रैल) में परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। साथ ही पेपर सेटिंग, छापने से सेंटर तक पहुंचाने के लिए पॉलिसी बनाने का सुझाव भी दिया है। ताकि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पेपर प्रिंटिंग व दूरदराज तक पहुंचाने के लिए परिवहन के माध्यम का प्रयोग ना करना पड़े।
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रिपोर्ट में लिखा है कि प्रश्नपत्र एक ही भाषा में तैयार होने चाहिए, चाहे वह अंग्रेजी हो या हिंदी। प्रश्न पत्र बनाने वाले, पेपर सेट करने वालों की संख्या बढ़ाने के साथ उसमें नियमित बदलाव भी करना होगा। प्रश्न बैंक तैयार करें। जिसमें उच्च शिक्षित विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। नए प्रश्नों को शामिल करने के साथ-साथ पुराने  समय-समय पर डिलीट होने चाहिए।
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सरकार के स्कूलों को बनाए सेंटर  
कमेटी ने निजी स्कूलों की बजाय केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, आर्मी पब्लिक स्कूल राज्य सरकारों के स्कूलों को सेंटर बनाने का सुझाव दिया है। सेंटर बनाने के मापदंड तैयार होने चाहिए, ताकि हर स्कूल सेंटर न बन सकें। प्रश्न पत्र व प्रश्न सेट करने वाले, कस्टोडियन, माडरेटर नियुक्त करने से पहले उसके प्रोफाइल की जांच हो। कस्टोडियन को सीसीटीवी के समक्ष ही प्रश्न पत्र खोलना चाहिए। मेट्रो, बड़े शहरों में सिर्फ एक कस्टोडियन होना चाहिए। प्रिंसिपल को यह ड्यूटी दी जा सकती है। 

एक जैसे विषयों को मर्ज करें 

कमेटी ने जांच में पाया कि ऐसे विषय जिसमें एक से दस छात्र रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परीक्षा की तैयारी देशभर में होती है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि दर्जनों ऐसे विषय जिनकी कोई डिमांड नहीं है, उन्हें हटा देना चाहिए। जबकि कुछ ऐसे विषय भी हैं, जोकि एक जैसे होते हैं, उन्हें मर्ज कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए। जबकि जिन विषयों में छात्रों की संख्या कम है, उनकी परीक्षा स्कूल स्तर पर जनवरी से फरवरी के बीच होनी चाहिए, लेकिन फरवरी के आखिर से पहले खत्म की जाए। बोर्ड का काम प्रश्नपत्र तैयार करना, उसे स्कूल तक पहुंचाना व उत्तर पुस्तिका की जांच हो। 

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