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सीबीआई ने कहा: पश्चिम बंगाल में कोयला चोरी की जांच करना हमारा अधिकार
Thu, 11 Mar 2021 03:15 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 11 Mar 2021 03:15 AM IST
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सीबीआई
- फोटो : फाइल फोटो
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से चंद दिनों पहले सीबीआई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उसे राज्य में कोयला चोरी मामले की जांच करने का पूरा अधिकार है और इसके लिए उसे प्रदेश सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सीबीआई के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी से इसी मामले में पूछताछ की गई थी।
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सीबीआई ने हलफनामा दायर कर कहा कि केंद्र सरकार कोल इंडिया या ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के माध्यम से कोयले को नियंत्रित व विनियमित करती है और मौजूदा मामला कोयला चोरी से जुड़ा है।
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जांच एजेंसी का कहना है कि कोयला क्षेत्र देश के विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है और इसलिए यह जरूरी है कि बड़ी साजिश और अंतरराज्यीय आयाम की जांच राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र वाली एजेंसी (सीबीआई) द्वारा की जाए।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर एजेंसी ने कहा, जांच के लिए राज्य से पूर्व अनुमति जरूरी नहीं
राज्य की सहमति के बिना सीबीआई जांच के खिलाफ दायर अनूप मांझी की याचिका का जवाब देते हुए सीबीआई ने कहा है कि यह सवाल उठाना महत्वहीन है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग के अधीन रहते हुए सीबीआई को जांच जारी रखने और पूरा करने का अधिकार है।
एजेंसी का कहना है कि एफआईआर में दर्ज आरोपियों पर करोड़ों रुपये के प्राकृतिक संसाधनों की चोरी करने का आरोप है। इससे केंद्र सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचा है।
एजेंसी ने कहा कि वह राज्य सरकार की पूर्व सहमति के बिना ‘रेलवे क्षेत्रों’ में जांच का संचालन कर सकता है। यह इंगित करना भी प्रासंगिक है कि सतर्कता टीम और टास्क फोर्स द्वारा 20 अगस्त 2020 को एक रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से पता चला था कि जनता को धोखा देने के लिए बड़े स्तर पर साजिश रची गई। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि संसद ने घोषित कर रखा है कि देश में कोयला खदान विनियमन केंद्र सरकार के जिम्मे है।