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माइनिंग घोटाला में सीबीआई का खुलासा: ड्राइवरों से कहा गया, जितना लूटा जा सके लूट लो

Sat, 05 Jan 2019 08:18 PM IST
Nilesh Kumar जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 05 Jan 2019 08:18 PM IST
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CBI reaveals about Mining scam in Uttar pradesh
cbi - फोटो : PTI

उत्तरप्रदेश के हमीरपुर में अवैध माइनिंग करने वालों ने जमकर लूटपाट मचाई। शासन-प्रशासन के नुमाइंदों ने ड्राइवरों को यह छूट दे रखी थी कि माइनिंग में अवैध वसूली करो। वाहन मालिकों को नहीं छोड़ना, लीज होल्डरों से भी वसूली करो।

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माइनिंग क्षेत्र में ऐसा कोई बचने न पाए, जो बिना कुछ दिए यहां से बाहर चला जाए। सरकारी और प्राइवेट वाहन चलाने वाले ड्राइवरों को जब इतनी छूट मिली तो उन्होंने दिन-रात लग कर हमीरपुर की माइनिंग साइट से लूट और फिरौती के जरिए करोड़ों रुपये कमा लिए। सीबीआई ने शनिवार को इस मामले में 14 जगहों पर रेड की हैं।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, 2012-2016 के बीच हमीरपुर माइनिंग साइट पर सभी तरह के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। नियमों के खिलाफ माइनिंग का टेंडर जारी कर दिया गया। एनजीटी ने उक्त अवधि के दौरान कुछ समय के लिए यहां किसी भी तरह की माइनिंग पर रोक लगा दी थी।
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चर्चित आईएएस रही बी. चंद्रकला भी फंसी

हैरान करने वाली बात ये है कि तत्कालीन डीएम बी.चंद्रकला (2008 बैच की आईएएस) और उस वक्त माइनिंग महकमे की मंत्री रही गायत्री प्रजापति व दूसरे ओहदे पर बैठे लोगों ने एनजीटी के आदेशों को खूंटी पर टांग दिया। रोक की अवधि के दौरान अवैध तरीके से माइनिंग का टेंडर जारी किया गया।

न केवल नए टेंडर, बल्कि पुराने टेंडर का भी नवीनीकरण कर दिया। बड़े ओहदे पर बैठे लोगों के ड्राइवरों को लीज होल्डरों से फिरौती मांगने की छूट दे दी गई। जो नहीं देता, उनकी गाड़ियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। ड्राइवरों ने जमकर उत्पात मचाया।

सूत्रों का कहना है कि रात के समय ये ड्राइवर अपने लोगों को किसी भी माइनिंग साइट पर भेज देते थे। वहां वे डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली लगाकर उससे भरने लगते। नियमानुसार, यह हक केवल उसी का होता है, जिसने साइट को लीज पर लिया है। यहां सब कुछ उल्टा था। ड्राइवरों के सामने कोई बोल नहीं सकता था।
 
डीएम ने बिना ई-टेंडरिंग किए ही साइट अलॉट कर दी

सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल के मुताबिक, सरकारी नियमानुसार, माइनिंग का टेंडर केवल ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत अलॉट किया जाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस नियम की कोई परवाह नहीं की। मैनुअली तरीके से प्रक्रिया अपनाकर माइनिंग का टेंडर दे दिया गया।

माइनिंग क्लर्क राम आसरे प्रजापति के हमीरपुर स्थित आवास पर भी सीबीआई रेड हुई है। इनके पास से कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिससे कई बड़े लोगों पर आंच आ सकती है। इसी विभाग से रिटायर्ड क्लर्क राम अवतार सिंह के जालोन स्थित मकान पर छापा पड़ा है।


एजेंसी का कहना है कि ये क्लर्क 2016 में रिटायर हुए थे। ये पांच वर्ष तक सस्पेंड भी रहे हैं।  इनके यहां से सीबीआई ने दो करोड़ रुपये नकद और दो किलो सोना बरामद किया है। बता दें कि 2012 से लेकर 2016 तक माइनिंग विभाग दो लोगों के पास रहा है। एक गायत्री प्रजापति और दूसरे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। गायत्री के मंत्री पद से हटने के बाद माइनिंग मंत्रालय करीब एक-डेढ़ साल तक सीएम के पास रहा था।

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