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CBI Raid in Mumbai: 34 हजार करोड़ के दीवान हाउसिंग घोटाले में मुंबई में सीबीआई छापे, 15 जगह चल रही जांच
Wed, 22 Jun 2022 02:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 22 Jun 2022 02:55 PM IST
सार
सीबीआई के अनुसार डीएचएफएल द्वारा गलत ढंग से कर्ज बांटने के कारण कर्जदाताओं के एक समूह को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
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डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन
- फोटो : social media
विस्तार
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में उद्धव ठाकरे सरकार पर संकट से सियासी सरगर्मी के बीच अब सीबीआई ने भी आर्थिक घोटालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई छेड़ दी है। सीबीआई ने आज दीवान हाउसिंग फाइनेंस (DHFL) से जुड़े 34,615 करोड़ के घोटाले में मुंबई में 15 जगह एक साथ जांच शुरू की।
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सीबीआई के अनुसार डीएचएफएल द्वारा गलत ढंग से कर्ज बांटने के कारण कर्जदाताओं के बैंक समूह को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। सीबीआई ने इस मामले में कपिल व धीरज वधावन के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन पर बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। वधावन बंधु डीएचएफएल के प्रवर्तक रहे हैं।
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यह देश में अब तक की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी का मामला है। इसके पूर्व में एबीजी शिपयार्ड पर 23,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। पीएनबी घोटाला भी 14 हजार करोड़ का था, जिसमें नीरव मोदी व मेहुल चोकसी आरोपी हैं। दोनों देश से बाहर भाग निकले हैं।
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वधावन बंधुओं को यूपीपीसीएल मामले में किया था गिरफ्तार
चार सप्ताह पहले सीबीआई ने कपिल और धीरज वधावन को मुंबई से गिरफ्तार किया था। यह मामला उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लि. (यूपीपीसीएल) के कर्मचारियों के भविष्य निधि की 2631.20 करोड़ रुपये की रकम अवैध तरीके से निवेश कराने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर हेराफेरी का है।
यस बैंक मामले में गिरफ्तार किए गए थे
इससे पहले डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन को यस बैंक के 5,050 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में दो साल पहले मई 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने कपिल को जमानत दे दी थी।
वधावन बंधु ने 66 कंपनियों में डाले 29,100 करोड़ रुपये
सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि., उसके पूर्व सीएमडी कपिल वधावन और निदेशक धीरज वधावन ने मिलते जुलते नाम वाली 66 संस्थाओं में 29,100 करोड़ रुपये का भुगतान किया। जबकि 29,849 करोड़ रुपये बकाया था। बही खातों की जांच में पाया गया कि ऐसी संस्थाओं और व्यक्तियों के अधिकांश लेन-देन भूमि और संपत्तियों में निवेश के रूप में किए गए।
डीएचएफएल खातों में एक और प्रमुख बकाया 1 अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2018 के बीच 65 संस्थाओं को दिए गए 24,595 करोड़ रुपये के ऋण और अग्रिमों से उत्पन्न 11,909 करोड़ रुपये का था। डीएचएफएल व उसके प्रवर्तकों ने प्रोजेक्ट फाइनेंस के रूप में भी 14,000 करोड़ रुपये का वितरण किया, लेकिन बही खातों में इसे खुदरा ऋण के रूप में दिखाया गया।
इसके कारण 181664 झूठे खुदरा ऋणों का पोर्टफोलियो तैयार हो गया। जिसमें कुल 14,095 करोड़ रुपये बकाया था। बांद्रा बुक्स नाम से संदर्भित ऋणों का एक अलग बही खाता तैयार किया गया। बाद में इसका अन्य बड़े प्रोजेक्ट ऋणों के साथ विलय कर दिया गया था। सीबीआई अब बांद्रा बुक्स की भी जांच कर रही है।