सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव पर भी हैं भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप
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सीबीआई का दामन पर सामने आए दाम हटने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को रिश्वतखोरी के आरोपों की लड़ाई में हटाया था, लेकिन उनकी जगह अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव का दामन भी भ्रष्टाचार के आरोपों के दागों से मैला दिखाई दे रहा है। राव के खिलाफ लगे आरोपों की सीबीआई में ही आंतरिक जांच भी की जा चुकी है। राव पर आरोप है कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पेडापलाकालुरू गांव में 25 लाख रुपये देकर 13668 वर्ग फीट भूमि खरीदी थी।
राव, उनकी पत्नी मनेम संध्या और पत्नी के चचेरे भाई रत्ना बाबू के नाम पर खरीदी गई इस जमीन पर 6563 वर्ग फीट एरिया में निर्माण भी है। 18 सितंबर 2010 को खरीदी गई इस जमीन के लिए राव ने कोलकाता की एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 25 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उस समय ओडिशा में कार्यरत राव ने आंध्र प्रदेश में जमीन खरीदने के लिए कोलकाता की कंपनी से कर्ज लिया।
पत्नी की है कर्ज देने वाली कंपनी
कोलकाता के साल्टलेक में महज दो कमरों के मकान में चलने वाली इस कंपनी के निदेशक मंडल में खुद राव की पत्नी भी मौजूद हैं। इस कंपनी के मुख्य निवेशकों में कोलकाता के प्रवीण अग्रवाल के परिवार के कई सदस्य थे, जिनके पास कुल मिलाकर साढे़ तीन करोड़ रुपये के शेयर थे। मजे की बात ये है कि इतने निवेश वाली इस कंपनी का कोई बिजनेस नहीं है यानी ये स्पष्ट तौर पर एक शेल (मुखौटा) कंपनी है।
जानकारी छिपाकर किया था कंपनी में निवेश
जमीन हथियाने के भी हैं राव पर आरोप
राव पर 2011 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक महिला की जमीन हथियाने का भी आरोप लगा। अदालत में चल रहे इस मामले में 2015 में अचानक महज 7 लाख रुपये में समझौता हो गया, जबकि उस जमीन का बाजार भाव कहीं ज्यादा था। इसी तरह राव पर हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर लिमिटेड की सिडको इंडस्ट्रियल एरिया की बहुमूल्य जमीन को आवासीय बनाकर कौड़ियों के भाव बेचने के मामले में तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप है।
वर्मा ने शुरू कराई थी जांच
सीबीआई के दक्षिण भारत कार्यालय के तत्कालीन प्रमुख एम. नागेश्वर राव के खिलाफ लगे आरोपों की सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को भी जानकारी थी। उन्होंने इसकी जांच बंगलूरू स्थित सीबीआई की बैंकिंग और गंभीर फ्राड इकाई को सौंपी थी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर पर वर्मा ने राव को चेन्नई से हटाकर चंडीगढ़ भेज दिया था, लेकिन सीवीसी से अनुमति न मिलने की वजह से वे राव को एजेंसी से नहीं हटा पाए थे।
क्या सीबीआई में कोई साफ सुथरा व्यक्ति नहीं रह गया है?
सीबीआई निदेशक को हटाने की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि आखिर सीबीआई का प्रमुख किसी ऐसे आदमी को ही क्यों बनाया जा रहा है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। क्या सीबीआई में कोई साफ सुथरा व्यक्ति नहीं रह गया है या निदेशक बनने के लिए ऐसे आरोप लगे होना जरूरी योग्यता है? वर्मा और अस्थाना पर ये आरोप लगे, अब उनके बाद निदेशक का कार्य ग्रहण करने वाले राव पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।