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बालासोर हादसा: तीन रेलवे अधिकारियों ने मिटाए सबूत, गैर इरादतन हत्या का भी केस, सीबीआई ने दाखिल किया आरोपपत्र

Sat, 02 Sep 2023 05:36 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 02 Sep 2023 05:36 PM IST
सार

सीबीआई ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या), धारा 201 के साथ धारा 34 (साक्ष्य को नष्ट करने के साथ पढ़ा जाने वाला सामान्य कारण) और रेलवे अधिनियम की धारा 153 (जानबूझकर किए गए कृत्य से रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालना) लगाई है।

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CBI files chargesheet against three arrested railway officials in Balasore train accident
ओडिसा ट्रेन हादसा - फोटो : Social Media

विस्तार

बालासोर रेल हादसे में सीबीआई ने शनिवार को भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया और मामले में गिरफ्तार तीन रेलवे अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या और साक्ष्यों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। दो जून को हुए इस हादसे में तीन ट्रेनों के आपस में टकराने से 296 लोगों की मौत हुई थी और 1,200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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सीबीआई ने मामले की जांच के तहत वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (सिग्नल) अरुण कुमार महंता, सेक्शन इंजीनियर अमीर खांड और टेक्नीशियन पप्पू कुमार को सात जुलाई को गिरफ्तार किया था। ये तीनों बालासोर जिले में ही तैनात थे। आरोपपत्र के मुताबिक, दो जून को कोरोमंडल एक्सप्रेस बालासोर के बाहानगा रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी से टकराई थी। उसके कुछ डिब्बे बगल की पटरी पर जा गिरे थे, जिनसे सामने से आ रही यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस टकरा गई थी।
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सीबीआई ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या), धारा 201 के साथ धारा 34 (साक्ष्य को नष्ट करने के साथ पढ़ा जाने वाला सामान्य कारण) और रेलवे अधिनियम की धारा 153 (जानबूझकर किए गए कृत्य से रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालना) लगाई है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि आरोपी पर बाहानगा बाजार रेलवे स्टेशन के सिग्नल और दूरसंचार संपत्तियों के कुशल रखरखाव की सीधी जिम्मेदारी थी।
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सही से नहीं हुआ सिग्नल और इंटरलॉकिंग का काम
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि पटरी पर बिना मंजूरी हो रहे मरम्मत कार्य की वजह से ट्रेन हादसा हुआ था। बाहानगा बाजार स्टेशन के पास लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर 94 की मरम्मत महंता ने एलसी गेट नंबर 79 के सर्किट आरेख का इस्तेमाल कर किया था। लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर 94 के संचालन को 110 वोल्ट एसी से 24 वोल्ड डीसी में बदलने के लिए उत्तरी गुमटी (हट) में किए जा रहे वायरिंग के काम में एलसी गेट नंबर 79 के विशिष्ट सर्किट आरेख का इस्तेमाल किया गया। महंता को यह सुनिश्चित करना था कि मौजूदा सिग्नल और इंटरलॉकिंग इंस्टॉलेशन का परीक्षण, ओवरहालिंग और बदलाव स्वीकृत योजना और निर्देशों के अनुसार हो, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

सीआरएस की रिपोर्ट में भी गलत सिग्नल हादसे की वजह
हादसे की जांच सीबीआई के अलावा रेलवे बोर्ड की ओर से रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) ने भी की है। तीन जुलाई को सीआरएस ने 40 पेज की रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी थी। रेलवे की ओर से कराई गई उच्चस्तरीय जांच में भी ‘गड़बड़ सिग्नल’ ही हादसे का प्रमुख कारण पाया गया था। यह भी सामने आया था कि कई स्तरों पर भारी चूक के कारण इतने लोगों की जान गई थी।

सीआरएस ने रेलवे बोर्ड को सौंपी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में कहा था कि सिग्नलिंग कार्य में खामियों के बावजूद यदि बाहानगा बाजार के स्टेशन प्रबंधक दो समानांतर पटरियों को जोड़ने वाले स्विचों का बार-बार असामान्य व्यवहार होने की सूचना देते तो सिग्नलिंग और दूरसंचार कर्मचारी उपचारात्मक कार्रवाई कर सकते थे। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि बाहानगा बाजार स्टेशन पर लेवल क्रॉसिंग गेट 94 पर इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर को बदलने के कार्यों के लिए स्टेशन-विशिष्ट अनुमोदित सर्किट आरेख की आपूर्ति न करना एक गलत कदम था, जिसके कारण गलत वायरिंग हुई। फील्ड पर्यवेक्षकों की एक टीम ने वायरिंग आरेख को संशोधित तो किया, लेकिन उसे हूबहू वैसा ही बनाने में विफल रही।


सारे तार गलत जुड़े थे मरम्मत के दौरान गड़बड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, लेवल-क्रॉसिंग लोकेशन बॉक्स के अंदर सारे तार गलत जुड़े थे। इससे मरम्मत कार्य के दौरान गड़बड़ी हुई, जिसके चलते गलत फंक्शन इंडिकेट हो रहे थे। इसके बारे में सालों तक पता नहीं चल सका। हादसे के लिए सिग्नलिंग विभाग को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। रिपोर्ट में स्टेशन मास्टर का नाम भी है, जो सिग्नलिंग कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी का पता नहीं लगा पाए। बालासोर में एक अन्य जगह भी लोकेशन बॉक्स के डायग्राम का इस्तेमाल बहनागा बाजार के लोकेशन बॉक्स के लिए हुआ था। ये एक गलत कदम था, जिसके चलते गलत वायरिंग हुई।

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