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CBI: सीबीआई ने फर्जी नौकरी रैकेट का किया पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार; कई राज्यों में कर चुके करोड़ों की ठगी

Fri, 10 Nov 2023 11:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 10 Nov 2023 11:12 PM IST
सार

CBI: अधिकारियों ने बताया कि पटना, मुंबई, मंगलूरू, बंगलूरू, धनबाद से ये रैकेट चलाया जा रहा था। इन शहरों में नौ जगहों पर छापे और तलाशी के दौरान कर्नाटक निवासी अजय कुमार, झारखंड निवासी अमन कुमार उर्फ रूपेश और बिहार के विशाल उर्फ अभिषेक सिंह की गिरफ्तारी हुई है।

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CBI busts interstate fake job racket, three arrested
CBI - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फर्जी सरकारी नौकरी दिलाने के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य अब तक कई राज्यों के लोगों से करोड़ो रुपये की ठगी कर चुके हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि पटना, मुंबई, मंगलूरू, बंगलूरू, धनबाद से ये रैकेट चलाया जा रहा था। इन शहरों में नौ जगहों पर छापे और तलाशी के दौरान कर्नाटक निवासी अजय कुमार, झारखंड निवासी अमन कुमार उर्फ रूपेश और बिहार के विशाल उर्फ अभिषेक सिंह की गिरफ्तारी हुई है। ये लोग पिछले दो साल से यह रैकेट चला रहे थे। सीबीआई ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। गिरोह ने मुंबई में साकीनाका और पटना में अपने दफ्तर खोल रखे थे।

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सीबीआई ने एक बयान में कहा कि गिरोह के सदस्य केंद्र सरकार के विभागों और भारतीय खाद्य निगम और जीएसटी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नौकरी दिलाने के नाम पर एक-एक व्यक्ति से 10 से 20 लाख रुपये लेते थे। गिरोह के लोग युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र देते थे। उसके बाद गिरोह की तरफ से उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता था। 

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एजेंसी के प्रवक्ता ने बताया कि छापे के दौरान लगभग 25 लोग ऐसे भी मिले जिन्हें नौकरी के लिए फर्जी लेटर दिया जाना था। साकीनाका ट्रेनिंग सेंटर की तलाशी में नौकरी के लिए पहुंचे जो लोग पाए गए उन्हें ज्यादातर कर्नाटक और कुछ महाराष्ट्र के थे।

प्रवक्ता ने बताया कि छापे में कई फर्जी काल लेटर, फर्जी नियुक्ति पत्र और प्रशिक्षण के लिए तैयार फर्जी सामग्री समेत कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि सीबीआई को बंगलूरू में एक आरोपी का एक साथी मिला, जो दो संभावित नौकरी चाहने वालों को कथित तौर पर नौकरी की असलियत साबित करने के लिए नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए जीएसटी कार्यालय के अंदर ले जा रहा था। गिरोह अपने को सही दिखलाने के लिए इसी तरह से काम करता था। 

मंगलूरू में दो मुख्य आरोपी एक फर्जी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करते हुए पकड़े गए। यह भी आरोप लगाया गया है कि अभियुक्तों ने नागपुर, धनबाद, पटना, बक्सर और बंगलूरू में नौकरी चाहने वालों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया था।

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