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भारतीय संस्कृति के संरक्षण की जिम्मेदारी सेंसर बोर्ड की: पहलाज निहलानी
एजेंसी/ मुंबई/ भोपाल
Updated Sun, 26 Feb 2017 04:41 AM IST
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फाइल फोटो
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सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने कहा है कि सेंसर बोर्ड न केवल फिल्मों को प्रमाणपत्र देने के लिए है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को बचाए रखने के लिए भी जिम्मेदार है। निहलानी फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का को हरी झंडी न देने के फैसले पर सेंसर बोर्ड को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेट सरकार का हिस्सा है और इसका काम न केवल फिल्म को प्रमाणपत्र बांटना है, बल्कि देश की सांस्कृतिक परंपरा को भी संभालकर रखना है। उन्होंने कहा कि इसलिए यह जरूरी है कि केवल अच्छी फिल्म ही दर्शकों को दिखाई जाएं।
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सेंसर बोर्ड से ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ पर रोक लगाने की मांग
लिपस्टिक अंडर माई बुर्का का दृश्य
एक मुस्लिम संगठन ने सेंसर बोर्ड से कहा है कि वह प्रकाश झा की फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का फिल्म को प्रमाणपत्र न दे। फिल्म की निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव पहले ही संकट में हैं क्योंकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इस फिल्म को महिला आधारित होने और अश्लील शब्दों के कारण हरी झंडी देने से मना कर दिया है।
मध्य प्रदेश की ऑल इंडिया मुस्लिम तेहवर कमेटी की सलाहकार समिति ने शुक्रवार को हुई बैठक में इस फिल्म की आलोचना की थी। कमेटी की राज्य इकाई के चेयरमैन औसफ शमीरी खुर्रम ने आरोप लगाया कि यह फिल्म हमारी महिलाओं की गरिमा और इस्लाम के सिद्धांत के खिलाफ है।
एआईएमटीसी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से आग्रह किया है कि वह फिल्म को प्रमाणपत्र न दे। इस फिल्म की शूटिंग भोपाल में हुई है। गौरतलब है कि इस फिल्म को टोकियो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में स्पिरिट ऑफ एशिया अवार्ड और मुंबई फिल्म महोत्सव में लैंगिक समानता के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑक्सफैम अवार्ड मिल चुका है।
मध्य प्रदेश की ऑल इंडिया मुस्लिम तेहवर कमेटी की सलाहकार समिति ने शुक्रवार को हुई बैठक में इस फिल्म की आलोचना की थी। कमेटी की राज्य इकाई के चेयरमैन औसफ शमीरी खुर्रम ने आरोप लगाया कि यह फिल्म हमारी महिलाओं की गरिमा और इस्लाम के सिद्धांत के खिलाफ है।
एआईएमटीसी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से आग्रह किया है कि वह फिल्म को प्रमाणपत्र न दे। इस फिल्म की शूटिंग भोपाल में हुई है। गौरतलब है कि इस फिल्म को टोकियो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में स्पिरिट ऑफ एशिया अवार्ड और मुंबई फिल्म महोत्सव में लैंगिक समानता के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑक्सफैम अवार्ड मिल चुका है।