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Cauvery Row: उलझता जा रहा कावेरी जल विवाद, CWMA में सिद्धारमैया सरकार ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका

Sat, 30 Sep 2023 09:38 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 30 Sep 2023 09:38 AM IST
सार

Karnataka Cauvery Water Issue: सीडब्ल्यूएमए ने शुक्रवार को सीआरडब्ल्यूसी के उस निर्देश का समर्थन किया, जिसमें कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था। इस पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कह दिया है कि वह पानी नहीं दे सकते।

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Cauvery water: Karnataka govt to file review petition before apex court, CWMA
Siddaramaiah - फोटो : social media

विस्तार

कावेरी नदी के पानी को छोड़ने का मामला उलझता जा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा कि पानी छोड़े जाने के आदेश पर शनिवार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि वह पानी नहीं छोड़ सकती। राज्य सरकार इसके साथ ही वैकल्पिक जलाशय के निर्माण की इजाजत मांगी है। समान पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता ने कुछ राय और सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार को विशेष रूप से राज्य की सिंचाई परियोजनाओं के संबंध में एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति बनाने का सुझाव दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सुझावों पर कहा, डाटा संग्रह और सलाह का काम समिति को करना चाहिए।
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 इससे पहले, सीडब्ल्यूएमए ने शुक्रवार को अपने सहायक निकाय कावेरी जल नियमन समिति (सीआरडब्ल्यूसी) के उस निर्देश का समर्थन किया, जिसमें कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था। इस पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कह दिया है कि कर्नाटक के पास पर्याप्त पानी नहीं है। इसलिए वह पानी नहीं दे सकते।

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मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और राज्य के पूर्व महाधिवक्ताओं के साथ बैठक के बाद अपने गृह कार्यालय 'कृष्णा' में पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ राय और सुझाव मिले हैं। राज्य की सिंचाई परियोजनाओं के संबंध में विशेष रूप से सरकार को एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति बनाने का सुझाव दिया गया है।

उन्होंने सुझाव के बारे में बैठक में जानकारी दी। कहा कि आंकड़ों का संग्रह और सलाहकार का काम समिति द्वारा किया जाना चाहिए। समिति को सरकार को सलाह देनी चाहिए और अंतरराज्यीय जल विवादों के बारे में कानूनी टीम को जानकारी देनी चाहिए। 

सिद्धारमैया ने कहा कि उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, गृह मंत्री जी परमेश्वर, कानून मंत्री एच के पाटिल और कृषि मंत्री एन चेलुवरयास्वामी भी मौजूद थे।

 

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