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कावेरी जल विवादः सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध, बंगलुरू-मैसूर हाई-वे जाम

Tue, 06 Sep 2016 04:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 06 Sep 2016 04:13 PM IST
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Cauvery row: Bengaluru-Mysuru highway blocked, protests intensify
कावेरी जल विवाद
कावेरी नदी के जल बंटवारे मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को आदेश दिया है कि वह कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु के लिए भी रिलीज करे।
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इस फैसले के बाद कर्नाटक के कई संगठन और किसान सड़कों पर उतर आए हैं। तमिलनाडु और केरल जाने वाली सड़कों पर इसका खासा असर देखने को मिला है। प्रदर्शनकारियों ने बेंगलुरु-मैसूर हाईवे जाम कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया।  
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बंद के आह्वान को देखते हुए सरकारी दफ्तरों में हाजिरी कम रही। प्रभावित जिलों में अवकाश की घोषणा पहले ही कर दी गई थी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कर्नाटक सरकार ने कृष्णा राजा सागर बांध से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा तो किसान इस पर कब्जा कर लेंगे।
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पढ़ें, कावेरी जल विवाद के 10 अहम घटनाक्रम

Cauvery row: Bengaluru-Mysuru highway blocked, protests intensify
कावेरी जल विवाद
1- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह तमिलनाडु को अगले 10 दिनों में 15000 क्यूसेक पानी सप्लाई करे ताकि वहां के किसानों को राहत मिल सके।
 
2- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को दौरान तमिलनाडु का कहना था कि कर्नाटक को कावेरी नदी का पानी मिलता चाहिए।  कावेरी नदी मुख्य तौर पर कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में बहती है।  हर राज्य इसके अधिक पानी पर अधिकार जताता है। 
  
3- कावेरी जल विवाद करीब 100 साल पुराना है। अंग्रेजी राज में यह विवाद मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर रियासत के बीच था। बाद में एक समझौता हुआ। 

4- - 1924 में  मद्रास और मैसूर के बीच समझौता हुआ  लेकिन बाद में केरल और पुद्दुचेरी भी इस विवाद में आ गए क्योंकि नदीं इन राज्यों से भी होकर बहती है।
 
5-1972 में एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आई। इसके आधार पर 1976 में चारों राज्यों के बीच एक समझौता हो गया। लेकिन किसी भी राज्य ने इसका पालन नहीं किया । 

6-  1986 में तमिलनाडु ने केंद्र सरकार से  इस विवाद के निपटारे के लिए न्यायिक आयोग बनाए जाने की मांग की। 

7 - तमिलनाडु के किसानों की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आयोग बनाने का निर्देश दिया।
 
8- आखिरकार 1990 में न्यायिक आयोग बनाया गया जिसने  2007 में अपना फैसला दिया। 

 9 फैसले के बाद भी विवाद नहीं निपटा और कोई न कोई पक्ष नाराज ही रहा। 

10- मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अब कोर्ट ने अपना फैसला तो विरोध हो रहा है।
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