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CAT: डॉक्टर की याचिका पर केंद्र और एम्स को नोटिस, नियमित सहायक प्रोफेसर के पद पर चयन न करने का मामला

Sat, 16 Dec 2023 08:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 16 Dec 2023 08:12 PM IST
सार

CAT: याचिका में डॉक्टर ने दावा किया था कि उनका चयन न होना मनमानी है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अधिकरण ने अपने 14 दिसंबर के आदेश में कहा, 'हम प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हैं, जिसका जवाब पांच फरवरी 2024 को दिया जाना चाहिए।
 

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CAT seeks Centre's stand on doctor's plea over non-selection for post in AIIMS
केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने एक डॉक्टर की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। मामला दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर के नियमित संकाय पद पर उनके चयन न होने को लेकर है। 

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कैट ने पांच फरवरी जवाब देने को कहा
अधिकरण ने डॉक्टर विजय कुमार की याचिका पर केंद्र और एम्स को नोटिस जारी किया। याचिका में कुमार ने दावा किया था कि उनका चयन न होना मनमानी है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अधिकरण ने अपने 14 दिसंबर के आदेश में कहा, 'हम प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हैं, जिसका जवाब पांच फरवरी 2024 को दिया जाना चाहिए। वकील वी एसआर कृष्णा और प्रदीप कुमार शर्मा ने अपने प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया। 

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याचिका में क्या कहा गया था?
याचिका में कहा गया था कि दिल्ली के एम्स ने 2021 में विभिन्न विषयों में कई नियमित संकाय पदों का विज्ञापन दिया था। खुद को योग्य पाते हुए डॉक्टर ने सहायक प्रोफेसर के पद के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत आवेदन किया। लेकिन, उनका चयन नहीं किया गया। उन्होंने अपनी शिकायत के साथ संस्थान के शासी निकाय से संपर्क किया, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया।
 

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स्थायी चयन समिति ने नहीं की नाम की सिफारिश
याचिका में कहा गया था कि जिस दिन एम्स द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था। आवेदक पहले से ही अनुबंध पर जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर रहा था। पद के पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले आवेदक को नौ अक्तूबर 2022 को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। हालांकि, स्थायी चयन समिति ने ओबीसी श्रेणी के तहत जेरियाट्रिक मेडिसिन में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए उनके नाम की सिफारिश नहीं की। वकील राजेंद्र यादव के जरिए दायर याचिका में कहा गया कि उक्त पद को खाली रखने का फैसला किया गया था।

इसमें कहा गया, 'आवेदक और अनारक्षित श्रेणी के तहत चयन के लिए अनुशंसित व्यक्ति (जिसके नाम की सिफारिश की गई) की शैक्षणिक योग्यता और अनुभवों की तुलना करने पर पता चलेगा कि चयन समिति द्वारा नामों की सिफारिश करने में पक्षपातपूर्ण और अनुचित दृष्टिकोण अपनाया गया है।'
 

याचिका में चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड मंगाने की भी मांग
याचिका में दलील दी गई थी कि चयन समिति और संचालन संस्था का फैसला 'पक्षपातपूर्ण' और 'अनुचित' है। जिसे साक्षात्कार के बाद चयन समिति द्वारा मूल रूप से दर्ज किए गए अंकों से देखा जा सकता है। याचिका में चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि चयन प्रक्रिया में पूर्वाग्रह और दुर्भावना इस तथ्य से भी पता चलती है कि उसी सात सदस्यीय चयन समिति ने पहले अनुबंध के आधार पर जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर के संकाय पद के लिए आवेदक के नाम की सिफारिश की थी। 

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