CAPF:अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों की अदालती जीत को हार में बदल रही सरकार! नवंबर में अवमानना याचिका पर सुनवाई
बॉर्डर के अचूक पहरेदार और आतंकियों के काल बने अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों ने अपने हित के लिए अदालत में जाने का रास्ता अख्तियार किया। वहां पर भी जीत भी मिल गई, लेकिन इसके बावजूद वे खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे हैं। वजह, केंद्र सरकार उनकी जीत को हार में बदल रही है।
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टर, जिन्हें एक ही पद पर कार्य करते हुए एक दशक से अधिक समय हो गया है, मगर उन्हें पदोन्नति नसीब नहीं हुई। कुछ इंस्पेक्टर तो ऐसे भी हैं, जो 14-15 साल से एक ही रैंक में ड्यूटी कर रहे हैं। बॉर्डर के अचूक पहरेदार और आतंकियों के काल बने अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों ने अपने हित के लिए अदालत में जाने का रास्ता अख्तियार किया। वहां पर भी जीत भी मिल गई, लेकिन इसके बावजूद वे खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे हैं। वजह, केंद्र सरकार उनकी जीत को हार में बदल रही है। हाईकोर्ट से जीते इंस्पेक्टरों के खिलाफ सरकार, सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। वहां से इंस्पेक्टर जीत गए तो भी सरकार ने उन्हें फायदा नहीं दिया। अवमानना का केस चल रहा है। आईटीबीपी और बीएसएफ के इंस्पेक्टरों की अवमानना याचिका पर नवंबर में सुनवाई होगी। इसी मामले में सीआरपीएफ के निरीक्षकों की सुनवाई 14 अक्तूबर को है।
सीएपीएफ के इंस्पेक्टरों का कहना है कि वे बॉर्डर पर हों या आतंकियों/नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। देश में कहीं पर कोई आपदा आती है तो वे लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। इतना कुछ होने पर भी सरकार उनके साथ न्याय नहीं कर रही। वे अदालती लड़ाई जीतते हैं तो सरकार उन्हें हरा देती है, क्योंकि फैसला लागू ही नहीं हो पाता। इंस्पेक्टरों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने 2008 में एक कार्यालय ज्ञापन (ओएम) जारी किया था। उसमें कहा गया कि ये 'ओएम', सभी विभागों में लागू होगा। जिन कर्मियों का 'ग्रेड पे' 48 सौ रुपये है और वे उस ग्रेड में चार साल की सेवा कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। यह बात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में खुद से लागू नहीं होती। इसके लिए सीएपीएफ निरीक्षकों को कोर्ट में जाना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने यह लड़ाई जीत ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका के इस मामले में 15 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के जेएस (पी) को सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दिया था। हालांकि उससे पहले ही आईटीबीपी ने इंस्पेक्टर सुशील कुमार को 54 सौ रुपये का ग्रेड पे देने का आदेश जारी कर दिया है, लेकिन उसके बाद फिर से वही बात। अदालत के आदेश को लागू करने में आनाकानी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक सुशील कुमार का वेतन, नए 'पे ग्रेड' में फिक्स नहीं हुआ है। मामला सीआरओ में पेंडिंग है।
सुशील को यह वित्तीय फायदा, 2019 से मिलना चाहिए था। '5400' का ग्रेड सहायक कमांडेंट का होता है। इसके कई दूसरे फायदे हैं। जैसे इस ग्रेड में कोई भी अधिकारी जब छुट्टी जाता है तो वह इकोनमी क्लास में हवाई यात्रा करने के लिए अधिकृत हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई से जुड़े कई दूसरे फायदे भी मिल जाते हैं। सुशील कुमार, तीस साल पहले एसआई भर्ती हुए थे। खास बात है कि कोर्ट के हस्तक्षेप से ही वे इंस्पेक्टर बने थे।
सुशील कुमार के केस में अवमानना याचिका की सुनवाई 24 नवंबर को तय की है।
बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों के अवमानना केस की सुनवाई अब 28 नवंबर को है। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस केस की सुनवाई थी, लेकिन समय अभाव के चलते मामले की सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया गया। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों के मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि 24 सितंबर से पहले 5400 का 'ग्रेड पे' लागू नहीं होता है तो विभाग के संबंधित अफसर दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूद रहें। बता दें कि इस केस में सरकार की 'एसएलपी' खारिज हो चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीएसएफ इंस्पेक्टरों के हक में जब फैसला दिया तो उसके बाद केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में चली गई थी। अभी तक बीएसएफ के याचिकाकर्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा। उन्हें अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ रही है।
डीजी बीएसएफ ने अपने इंस्पेक्टरों के मामले में 14 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ संचार किया था। इसमें कहा गया कि सुशील कुमार के केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2024 को फैसला सुनाया था। उसे सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी 13406/2025 के जरिए चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल के अपने फैसले में एसएलपी को खारिज कर दिया। इस मामले में बीएसएफ के लीगल अफसरों की राय ली गई है। उन्होंने अपनी राय में कहा है कि अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश लागू किया जाना जरुरी है। अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में एनएफयू का जो केस है यानी बीएसएफ इंस्पेक्टर आनन्द प्रताप सिंह का, उसे 54 सौ का 'ग्रेड पे' दे दिया जाए। बीएसएफ डीजी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उचित दिशा निर्देश जारी करने की प्रार्थना की थी।
आईटीबीपी निरीक्षक के मामले में अदालत की सुनवाई में बताया गया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अगस्त 2008 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, तो उनका ग्रेड पे 54 सौ हो जाएगा। इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स 'सीबीडीटी' में कार्यरत कर्मियों को भी यह फायदा नहीं मिल सका था। इस मामले में सीबीडीटी के इंस्पेक्टर एम सुब्रमणयम, '167/2009' कैट में चले गए। कैट ने भी इंस्पेक्टर के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उसके बाद एम सुब्रमणयम, मद्रास हाईकोर्ट (याचिका संख्या 13225/2010') में चले गए। सरकार ने अदालत में कहा, आपको ये लाभ नहीं मिलेगा। जो पदोन्नत होकर आए हैं, उन्हीं को ये लाभ मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, उक्त कर्मचारी को यह लाभ दिया जाए।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट 8883/2011 में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद सरकार को लताड़ लगाई। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। केंद्र सरकार, इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को फायदा देने के लिए तैयार नहीं हुई। सरकार की अपील भी 10 अक्तूबर 2017 को डिसमिस हो गई। सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो रिव्यू दो पेटिशन किए थे। ये भी 23 अगस्त 2018 को डिसमिस कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस मामले में जो एसएलपी रिजेक्ट की गई थी, केस का वही स्टे्टस रहेगा। इसके बाद सीबीडीटी ने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट में पेटिशन रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रुप 'बी' में यह आदेश लागू कर दिया। मतलब, वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, उनका ग्रेड पे 54 सौ रुपये हो जाएगा, ये फायदा दे दिया। सरकार ने कहा, यह आदेश केवल ग्रुप बी वालों के लिए ही लागू होगा। हालांकि यह 'पे ग्रेड' तो 'ग्रुप ए' में भी आता है, लेकिन 'ग्रुप बी' में ही ये फायदा दिया गया।
इसके पीछे वजह बताई गई कि 'ग्रुप बी' में कमजोर वर्ग है, उन्हें आर्थिक तौर पर सफल बनाना है। केंद्र सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी। सरकार ने कहा, सभी को ये फायदा नहीं मिलेगा, केवल पदोन्नति वालों को ही दिया जाएगा। खास बात है कि केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों में यह फायदा दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा। 'ग्रुप बी' 'सिविल' वालों को लाभ मिला, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों को इस फायदे से बाहर रखा गया। उन्हें मजबूरन, अदालतों की शरण लेनी पड़ रही है।