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CAPF: ठगा सा महसूस कर रहे हैं देश के लाखों पूर्व अर्धसैनिक! सैनिक कल्याण बोर्ड का बदला नाम, पर नहीं मिली राहत

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 19 Nov 2022 03:54 PM IST
सार

CAPF: 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के पदाधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर गठित उपरोक्त कल्याण बोर्ड में सेना के कर्नल, कप्तान व सूबेदार वर्षों से पदस्थ हैं। वहां पर जब पूर्व अर्धसैनिकों की पेंशन, पुनर्वास व अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर बात की जाती है, तो वे रटा रटाया जवाब दे देते हैं कि हमारे पास अभी आपका रिकॉर्ड ही नहीं है...

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CAPF: ex-paramilitary soldiers feeling cheated! Sainik Welfare Board name change, but did not get relief
Sainik Welfare Board - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड जवान और अधिकारी, खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। वजह, जिस तरह से सैनिक कल्याण बोर्ड, एक्स सर्विसमैन की समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर रहते हैं, वैसा कुछ पूर्व अर्धसैनिकों के मामले में नहीं हो पा रहा। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के अथक प्रयासों के बाद हरियाणा सरकार ने 2016 में एक नई व्यवस्था शुरू की थी। राज्य में पहले से कार्यरत सैनिक कल्याण बोर्ड के नाम की पट्टी बदल कर उस पर सेना/अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड लिख दिया गया। बोर्ड में हुए बदलाव के करीब छह साल बाद भी वहां पूर्व अर्धसैनिकों के मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा।

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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं, इसे लेकर जब वजह पूछी जाती है, तो टका सा जवाब मिलता है कि हमारे पास रिकॉर्ड ही नहीं है। ऐसे में ये कल्याण बोर्ड, पूर्व अर्धसैनिकों के लिए महज एक छलावा बन गए हैं। एसोसिएशन द्वारा पूर्व अर्धसैनिकों की लंबित मांगों, जिसमें पुरानी पेंशन बहाली भी शामिल है, को लेकर 14 फरवरी 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

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पहले मीटिंग बुलाई और फिर कैंसल की

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर गठित उपरोक्त कल्याण बोर्ड में सेना के कर्नल, कप्तान व सूबेदार वर्षों से पदस्थ हैं। इन्हें पूर्व अर्धसैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण से कोई मतलब नहीं है। वहां पर जब पूर्व अर्धसैनिकों की पेंशन, पुनर्वास व अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर बात की जाती है, तो वे रटा रटाया जवाब दे देते हैं कि हमारे पास अभी आपका रिकॉर्ड ही नहीं है। एसोसिएशन द्वारा इन्हीं दिक्कतों के संबंध में 4 सितंबर 2022 को प्रदेश के अर्धसैनिक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश यादव को अवगत कराया गया था। मंत्री ने एसोसिएशन द्वारा आयोजित पैरामिलिट्री महापंचायत में यह आश्वासन दिया था कि 25 से 30 सितंबर 2022 के बीच चंडीगढ़ में एक मीटिंग बुलाई जाएगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने बताया, वह मीटिंग टाल दी गई। उसके पीछे क्या वजह रही, ये भी नहीं बताया गया। मीटिंग का टलना, गंभीर चिंता का विषय है।

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मंत्री, संतरी से वादाखिलाफी करेगा तो क्या असर होगा?

अगर एक प्रांत का मंत्री, संतरी से वादाखिलाफी करेगा, तो सरहदों एवं पूरे देश की सुरक्षा में तैनात पैरामिलिट्री के जवानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बाद प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड की एक बैठक चंडीगढ़ में 17 नवंबर 2022 को तय की गई। बाद में उसे भी टाल दिया गया। बतौर एचआर सिंह, ये पूर्व अर्धसैनिकों का अपमान है। सरकार, उनके प्रति गंभीरता नहीं दिखा रही। हाल ही में सौतेले व्यवहार का एक ताजा मामला सामने आया है। हरियाणा सरकार द्वारा सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह को मात्र सात लाख रुपये की सम्मान राशि दी गई, जबकि आर्मी के जवान को इसी सम्मान राशि के तहत 31 लाख रुपये दिए जाते हैं। यानी वीरता के मामले में भी सरकार द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।

33 लाख परिवारों के कल्याण की तरफ कोई ध्यान नहीं

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, इनका पैरामिलिट्री के 33 लाख परिवारों के कल्याण की तरफ कोई ध्यान नहीं है। सुविधाओं के नाम पर पूर्व अर्धसैनिक ठगे से महसूस कर रहे हैं। सीएपीएफ के पूर्व अर्धसैनिकों की मांगों को लेकर कर्नाटक के फ्रीडम पार्क में 13 दिसंबर को शांतिपूर्ण रैली आयोजित की जाएगी। मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक ज्ञापन सौंपा गया है। पुरानी पेंशन बहाली, सीपीसी कैंटीन को जीएसटी से छूट देने, अर्ध सैनिक कल्याण बोर्ड का गठन, सरदार पटेल के नाम पर अर्ध सैनिक स्कूलों की स्थापना, रिटायर्ड पर्सन को एक्स मैन का दर्जा व अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना, ये सभी मुद्दे अभी तक ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं।

अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना भी नहीं हो पाई

पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, जब भारतीय सेना में झंडा दिवस कार्यक्रम आयोजित होता है, तो उसी तर्ज पर अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना क्यों नहीं की जा रही। ये मामला केंद्रीय गृह सचिव के संज्ञान में लाया गया था। उन्होंने आश्वासन भी दिया था कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गहराई से विचार कर रही है। बैठक में उन्होंने यह भरोसा दिलाया था कि 21 अक्तूबर को 'पुलिस स्मरणोत्सव दिवस' या 31 अक्तूबर को सरदार पटेल के जन्मदिन पर इस कोष की स्थापना कर दी जाएगी। अभी तक पैरामिलिट्री परिवारों के लिए अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना नहीं हो पाई। इस तरह के कोष को स्थापित करने में किसी विशेष बजटीय प्रावधान की आवश्यकता नहीं है। आम भारतीयों द्वारा स्वेच्छा से झंडा दिवस कोष में दान दिया जाएगा। इस कोष की राशि का इस्तेमाल रिटायर्ड अर्द्धसैनिकों, शहीद परिवारों, विधवाओं, विरांगनाओं के बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, बेटियों की शादियां व वृद्ध मां बाप के इलाज एवं पुनर्वास जैसे भलाई के कामों में किया जा सकेगा।

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