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Railways: कैंसर मरीजों को मिलेगी राहत, अब नहीं भटकना पड़ेगा टिकट के लिए; ऐसे मिलेगी इमरजेंसी कोटा सीट
Tue, 04 Aug 2026 08:35 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 04 Aug 2026 08:35 PM IST
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रेलवे
- फोटो : अमर उजाला
इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करने वाले कैंसर मरीजों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी राहत दी है। अब गंभीर स्थिति में यात्रा करने वाले कैंसर मरीजों और उनके अटेंडेंट को जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी कोटा के तहत कंफर्म सीट की सुविधा दी जाएगी। रेल मंत्रालय ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि कैंसर मरीजों की आपातकालीन यात्रा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह सुविधा कंप्यूटरीकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटरों के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है।
आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
रियायती टिकट पर सफर करने वाले कैंसर मरीज और उनके साथ जाने वाले एक अटेंडेंट को बुकिंग के समय ही इमरजेंसी कोटा का लाभ मिल सकता है। इसके लिए मरीज को केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त अस्पताल के प्रभारी अधिकारी द्वारा जारी वैध रियायत प्रमाण पत्र जमा करना होगा। (एड्स मरीजों के मामले में यह प्रमाण पत्र किसी अधिकृत एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर से जारी होना अनिवार्य है।) सीट की उपलब्धता और यात्रा की वास्तविक आवश्यकता की जांच के बाद ही कोटा मंजूर किया जाता है।
किस क्लास में कितनी सीट?
ट्रेनों में कैंसर मरीजों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से कुल 12 बर्थ का कोटा निर्धारित किया गया है। इनमें स्लीपर क्लास में सबसे ज्यादा 04 बर्थ, फर्स्ट क्लास 02 बर्थ,एसी 2-टियर में 02 बर्थ, एसी 3-टियर में 02 बर्थ और एसी चेयर कार में 02 बर्थ के लिए निर्धारित है। रेलवे के अनुसार, यह इमरजेंसी कोटा आमतौर पर वीआईपी, सांसदों और न्यायाधीशों जैसे हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन धारकों के लिए होता है, लेकिन स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को देखते हुए इसमें मरीजों को भी विशेष राहत दी जा रही है।
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आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
रियायती टिकट पर सफर करने वाले कैंसर मरीज और उनके साथ जाने वाले एक अटेंडेंट को बुकिंग के समय ही इमरजेंसी कोटा का लाभ मिल सकता है। इसके लिए मरीज को केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त अस्पताल के प्रभारी अधिकारी द्वारा जारी वैध रियायत प्रमाण पत्र जमा करना होगा। (एड्स मरीजों के मामले में यह प्रमाण पत्र किसी अधिकृत एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर से जारी होना अनिवार्य है।) सीट की उपलब्धता और यात्रा की वास्तविक आवश्यकता की जांच के बाद ही कोटा मंजूर किया जाता है।
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किस क्लास में कितनी सीट?
ट्रेनों में कैंसर मरीजों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से कुल 12 बर्थ का कोटा निर्धारित किया गया है। इनमें स्लीपर क्लास में सबसे ज्यादा 04 बर्थ, फर्स्ट क्लास 02 बर्थ,एसी 2-टियर में 02 बर्थ, एसी 3-टियर में 02 बर्थ और एसी चेयर कार में 02 बर्थ के लिए निर्धारित है। रेलवे के अनुसार, यह इमरजेंसी कोटा आमतौर पर वीआईपी, सांसदों और न्यायाधीशों जैसे हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन धारकों के लिए होता है, लेकिन स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को देखते हुए इसमें मरीजों को भी विशेष राहत दी जा रही है।
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