फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   'Can't travel beyond SC': NIA court says no to activist Varavara Rao's relocation plea

NIA Court: एल्गार परिषद मामले के आरोपी वरवरा राव को झटका, एनआईए कोर्ट ने खारिज की हैदराबाद जाने की याचिका

Wed, 18 Mar 2026 11:19 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Nirmal Kant Updated Wed, 18 Mar 2026 11:19 PM IST
सार

NIA Court: मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने यह कहते हुए कार्यकर्ता वरवरा राव को हैदराबाद में स्थायी रूप से रहने की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट की जमानत शर्तों में बदलाव निचली अदालत नहीं कर सकती। राव ने उम्र, बीमारियों और इलाज की सुविधा का हवाला दिया था। पढ़िए रिपोर्ट-

विज्ञापन
'Can't travel beyond SC': NIA court says no to activist Varavara Rao's relocation plea
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी कवि व कार्यकर्ता वरवरा राव को अपने गृहनगर हैदराबाद में स्थायी रूप से रहने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि वह उन जमानत की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार नहीं रखती, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है।
विज्ञापन


वरवरा राव (85 वर्षीय) ने उम्र और आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए एनआईए अदालत में हैदराबाद जाने की अनुमति मांगी थी। उनकी याचिका को विशेष जज चकोर बाविस्कर ने 16 मार्च को खारिज कर दिया। राव को 28 अगस्त 2018 को हैदराबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया था और उनका मामला विचाराधीन हैं। उन्हें 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर जमानत दी थी।
विज्ञापन


जमानत की शर्तें क्या हैं?
जमानत की शर्तों के अनुसार, राव को मुंबई में ही रहना होगा और एनआईए अदालत की अनुमति के बिना शहर से बाहर नहीं जा सकते। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि वह और उनकी पत्नी दोनों बीमार हैं और उन्हें परिवार के सहयोग की जरूरत है, जो हैदराबाद में रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में वरवरा राव ने क्या कहा था?
राव ने यह भी कहा कि हैदराबाद में इलाज कराना उनके लिए आसान होगा, क्योंकि उनकी बेटी डॉक्टर से शादीशुदा है और उनकी पोती भी मेडिकल क्षेत्र में है। उन्होंने बताया कि मुंबई में सीमित आय के साथ रहना उनके लिए कठिन हो रहा है। एनआईए ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राव सुप्रीम कोर्ट की जमानत शर्तों में बदलाव चाहते हैं, जिसकी अनुमति निचली अदालत नहीं दे सकती।

ये भी पढ़ें: प. एशिया संकट: ईरान में अभी भी 1000 भारतीय, CBSE की परीक्षा नहीं दे पाए खाड़ी देशों में फंसे 23 हजार छात्र


अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आगे नहीं जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल अस्थायी रूप से यात्रा की अनुमति दे सकती है, लेकिन स्थायी रूप से क्षेत्र छोड़ने की अनुमति नहीं दे सकती।

गौतम नवलखा का जिक्र क्यों किया?
राव ने अपनी याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से सह-आरोपी गौतम नवलखा को दिल्ली जाने की अनुमति देने का भी हवाला दिया था। इस पर अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने यह फैसला विशेष परिस्थितियों में दिया था और इसे अन्य मामलों में उदाहरण के रूप में नहीं लिया जा सकता। यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा है, जिसके बाद अगले दिन भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी।




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed