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प. एशिया संकट: ईरान में अभी भी 1000 भारतीय, CBSE की परीक्षा नहीं दे पाए खाड़ी देशों में फंसे 23 हजार छात्र
Wed, 18 Mar 2026 10:11 PM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:11 PM IST
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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच करीब एक हजार भारतीय अभी भी ईरान में मौजूद हैं। जबकि, खाड़ी देशों में रहने वाले 23 हजार छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की अंतिम परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में दी।
समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, करीब एक हजार लोग अभी भी ईरान में हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि उनमें से सभी वहां से निकलना चाहते हों। कांग्रेस नेता ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले कक्षा 10 और 12 के छात्र अपनी सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं नहीं दे सके।
उन्होंने कहा, मैंने पूछा कि उनकी समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। मुझे बताया गया कि विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है, ताकि उन 23 हजार छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके, जो परीक्षा नहीं दे पाए।
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थरूर ने कहा कि बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई और सभी सांसदों ने हालात, उसके प्रभाव, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों और तेल-गैस आपूर्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, हमें कुछ जवाब मिले, लेकिन सभी के जवाब नहीं मिले। विदेश सचिव बैठक में मौजूद नहीं थे।
सूत्रों के अनुसार, सदस्यों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की निंदा को लेकर भारत की चुप्पी और नागरिकों की मौत पर संवेदना जताने से जुड़े सवाल भी उठाए, लेकिन विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री बैठक में शामिल नहीं हुए।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट के बीच 2.6 लाख भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी, सरकार अलर्ट; लगातार हो रही निगरानी
सूत्रों ने बताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय बलों की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर भारत का रुख और भारतीय मिशनों को दिए गए निर्देशों जैसे सवालों के भी स्पष्ट जवाब नहीं मिले। जब पूछा गया कि संघर्ष शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा का मुद्दा उठा, तो थरूर ने कहा कि यह मुद्दा भी चर्चा में आया, लेकिन वह आंतरिक बातचीत का विवरण साझा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों की स्थिति यह है कि वहां से आना-जाना अभी भी काफी हद तक संभव है और संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान से उड़ानें हैं, जबकि कतर और बहरीन से कम उड़ानें हैं। उन्होंने कहा, अब लोग फंसे हुए नहीं हैं, लेकिन कुछ अन्य समस्याएं अभी भी हैं।
थरूर ने कहा कि बैठक में प्रवासी भारतीयों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह भी पूछा गया कि पेट्रोलियम लेकर कितने जहाज फंसे हुए हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के पास इसका सटीक आंकड़ा नहीं था। हालांकि, कुछ जहाज जरूर प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि बैठक के दूसरे हिस्से में एआई इम्पैक्ट समिट, उसके प्रभाव और भारत की टेक कूटनीति तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ संबंधों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा, यह एक अच्छी, व्यापक और विस्तृत बैठक थी।
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समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, करीब एक हजार लोग अभी भी ईरान में हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि उनमें से सभी वहां से निकलना चाहते हों। कांग्रेस नेता ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले कक्षा 10 और 12 के छात्र अपनी सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं नहीं दे सके।
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उन्होंने कहा, मैंने पूछा कि उनकी समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। मुझे बताया गया कि विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है, ताकि उन 23 हजार छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके, जो परीक्षा नहीं दे पाए।
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थरूर ने कहा कि बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई और सभी सांसदों ने हालात, उसके प्रभाव, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों और तेल-गैस आपूर्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, हमें कुछ जवाब मिले, लेकिन सभी के जवाब नहीं मिले। विदेश सचिव बैठक में मौजूद नहीं थे।
सूत्रों के अनुसार, सदस्यों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की निंदा को लेकर भारत की चुप्पी और नागरिकों की मौत पर संवेदना जताने से जुड़े सवाल भी उठाए, लेकिन विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री बैठक में शामिल नहीं हुए।
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सूत्रों ने बताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय बलों की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर भारत का रुख और भारतीय मिशनों को दिए गए निर्देशों जैसे सवालों के भी स्पष्ट जवाब नहीं मिले। जब पूछा गया कि संघर्ष शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा का मुद्दा उठा, तो थरूर ने कहा कि यह मुद्दा भी चर्चा में आया, लेकिन वह आंतरिक बातचीत का विवरण साझा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों की स्थिति यह है कि वहां से आना-जाना अभी भी काफी हद तक संभव है और संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान से उड़ानें हैं, जबकि कतर और बहरीन से कम उड़ानें हैं। उन्होंने कहा, अब लोग फंसे हुए नहीं हैं, लेकिन कुछ अन्य समस्याएं अभी भी हैं।
थरूर ने कहा कि बैठक में प्रवासी भारतीयों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह भी पूछा गया कि पेट्रोलियम लेकर कितने जहाज फंसे हुए हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के पास इसका सटीक आंकड़ा नहीं था। हालांकि, कुछ जहाज जरूर प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि बैठक के दूसरे हिस्से में एआई इम्पैक्ट समिट, उसके प्रभाव और भारत की टेक कूटनीति तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ संबंधों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा, यह एक अच्छी, व्यापक और विस्तृत बैठक थी।