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तलाक लेने आए थे, गिले-शिकवे भुलाकर लौटे... सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ वकील का जताया आभार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 22 Mar 2018 06:27 AM IST
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supreme court
पारिवारिक अदालतों को इसलिए बनाया गया था कि वो ‘शादी और परिवार के मामलों में सुलह को बढ़ावा देंगी तथा विवादों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करेंगी।’ सुप्रीम कोर्ट ने कई बार दिखाया है कि वह सिर्फ जटिल कानूनों की व्याख्या नहीं करता, बल्कि अपने वकीलों के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ने वाले जोड़ों को यह भी याद दिलाता है कि एक-दूसरे से बात करके भी आपसी विवाद खत्म किए जा सकते हैं।
यह मामला राजस्थान के पवन कुमार शर्मा और उनकी पत्नी सनी के बीच चल रहे तलाक के मुकदमे का है। पवन ने हिंदू विवाह अधिनियम के सेक्शन 13 के तहत पत्नी से तलाक की अर्जी दी थी। दोनों के बीच अल्वर की पारिवारिक अदालत में मामला चल रहा था। सनी ने इस मामले को गुरुग्राम ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुरू में दोनों को गुरुग्राम स्थित मध्यस्थता और सुलह केंद्र जाने का निर्देश दिया। हालांकि ये कोशिश नाकाम रही, क्योंकि पति ने इसमें शामिल नहीं हुआ। इसके बाद पीठ ने दोनों को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील गरिमा प्रसाद को पक्षकारों के साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। गरिमा ने दोनों के साथ लगभग तीन घंटे लंबी चर्चा की।
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यह मामला राजस्थान के पवन कुमार शर्मा और उनकी पत्नी सनी के बीच चल रहे तलाक के मुकदमे का है। पवन ने हिंदू विवाह अधिनियम के सेक्शन 13 के तहत पत्नी से तलाक की अर्जी दी थी। दोनों के बीच अल्वर की पारिवारिक अदालत में मामला चल रहा था। सनी ने इस मामले को गुरुग्राम ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
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न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुरू में दोनों को गुरुग्राम स्थित मध्यस्थता और सुलह केंद्र जाने का निर्देश दिया। हालांकि ये कोशिश नाकाम रही, क्योंकि पति ने इसमें शामिल नहीं हुआ। इसके बाद पीठ ने दोनों को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील गरिमा प्रसाद को पक्षकारों के साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। गरिमा ने दोनों के साथ लगभग तीन घंटे लंबी चर्चा की।
मध्यस्थ वकील से बातचीत के अगले दिन ही बदल गया दिलोदिमाग
हैरानी की बात है कि मध्यस्थ से बातचीत के अगले ही दिन दंपति ने पीठ से कहा कि वे साथ रहना चाहते हैं और अपने बच्चे के साथ पुणे जाएंगे। उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों अतीत के गिले-शिकवे भूलाकर एक दूसरे को माफ कर देंगे और खुशहाल जीवन बिताएंगे।
पति ने जहां अदालत से तलाक के मामले को खारिज करने का अनुरोध किया। वहीं पत्नी ने पति के खिलाफ आपराधिक मामलों को आगे न बढ़ाने की बात कही।
इस पर पीठ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाली वकील गरिमा प्रसाद की सराहना की। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम इस मामले में मध्यस्थ गरिमा प्रसाद की उत्कृष्ट भूमिका के प्रति आभार जताते हैं। उन्होंने दो दिन तक दोनों पक्षों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने और उनकी मदद करने में काफी समय बिताया। इससे दोनों एक स्वीकार्य समाधान पर पहुंचे।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विसेज कमेटी गरिमा प्रसाद को उनके सेवाओं के लिए 10,000 रुपये का मानदेय देगी।
पति ने जहां अदालत से तलाक के मामले को खारिज करने का अनुरोध किया। वहीं पत्नी ने पति के खिलाफ आपराधिक मामलों को आगे न बढ़ाने की बात कही।
इस पर पीठ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाली वकील गरिमा प्रसाद की सराहना की। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम इस मामले में मध्यस्थ गरिमा प्रसाद की उत्कृष्ट भूमिका के प्रति आभार जताते हैं। उन्होंने दो दिन तक दोनों पक्षों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने और उनकी मदद करने में काफी समय बिताया। इससे दोनों एक स्वीकार्य समाधान पर पहुंचे।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विसेज कमेटी गरिमा प्रसाद को उनके सेवाओं के लिए 10,000 रुपये का मानदेय देगी।