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High Court: उपभोक्ता फोरम गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता, कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश
Mon, 07 Apr 2025 02:23 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 07 Apr 2025 02:23 PM IST
सार
जस्टिस सुव्रा घोष ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून, उपभोक्ता फोरम को आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार नहीं देता है। जस्टिस घोष ने इसके बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी वारंट को निरस्त कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि उपभोक्ता फोरम गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता है, और यह केवल नागरिक जेल में हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह अहम टिप्पणी की। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
उच्च न्यायालय ने कहा- गिरफ्तारी वारंट जारी करना उपभोक्ता फोरम के अधिकार क्षेत्र में नहीं
जस्टिस सुव्रा घोष ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून, उपभोक्ता फोरम को आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार नहीं देता है। जस्टिस घोष ने इसके बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी वारंट को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि यह उपभोक्ता फोरम के अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात है।
ये भी पढ़ें- High Court: हाईकोर्ट के वकीलों ने किया सांध्यकालीन अदालत का विरोध, कहा-यह अव्यावहारिक व मानव प्रकृति के विपरीत
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क्या है मामला
यह मामला साल 2013 का है, जब एक व्यक्ति ने फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर एक ट्रैक्टर खरीदा। लोन देने वाली कंपनी और व्यक्ति के बीच ऋण को लेकर हुए समझौते पर विवाद हो गया। कर्जदार व्यक्ति जब कंपनी के 25,716 रुपये नहीं चुरा पाया, तो कंपनी ने व्यक्ति का ट्रैक्टर जब्त कर लिया। इस पर कर्जदार व्यक्ति ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता फोरम में शिरायत दर्ज कराईं। फोरम ने बकाया ऋण 25 हजार चुकाने पर ट्रैक्टर का पंजीकरण प्रमाण पत्र शिकायतकर्ता को सौंपने का निर्देश दिया। हालांकि जब याचिकाकर्ता ने निर्देश नहीं माना तो उपभोक्ता फोरम ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस वारंट के खिलाफ व्यक्ति ने उच्च न्यायालय का रुख किया। जहां अब उच्च न्यायालय ने उसे राहत देते हुए उपभोक्ता फोरम के आदेश पर रोक लगा दी।
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उच्च न्यायालय ने कहा- गिरफ्तारी वारंट जारी करना उपभोक्ता फोरम के अधिकार क्षेत्र में नहीं
जस्टिस सुव्रा घोष ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून, उपभोक्ता फोरम को आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार नहीं देता है। जस्टिस घोष ने इसके बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी वारंट को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि यह उपभोक्ता फोरम के अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात है।
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क्या है मामला
यह मामला साल 2013 का है, जब एक व्यक्ति ने फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर एक ट्रैक्टर खरीदा। लोन देने वाली कंपनी और व्यक्ति के बीच ऋण को लेकर हुए समझौते पर विवाद हो गया। कर्जदार व्यक्ति जब कंपनी के 25,716 रुपये नहीं चुरा पाया, तो कंपनी ने व्यक्ति का ट्रैक्टर जब्त कर लिया। इस पर कर्जदार व्यक्ति ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता फोरम में शिरायत दर्ज कराईं। फोरम ने बकाया ऋण 25 हजार चुकाने पर ट्रैक्टर का पंजीकरण प्रमाण पत्र शिकायतकर्ता को सौंपने का निर्देश दिया। हालांकि जब याचिकाकर्ता ने निर्देश नहीं माना तो उपभोक्ता फोरम ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस वारंट के खिलाफ व्यक्ति ने उच्च न्यायालय का रुख किया। जहां अब उच्च न्यायालय ने उसे राहत देते हुए उपभोक्ता फोरम के आदेश पर रोक लगा दी।