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Bengal OBC Row: ममता बोलीं- हाईकोर्ट का फैसला अस्वीकार, PM मोदी ने आदेश को विपक्ष के मुंह पर करारा तमाचा बताया

Thu, 23 May 2024 04:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 23 May 2024 04:57 AM IST
सार

कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी से लोकसभा चुनाव के बीच राजनीतिक बहस छिड़ गई। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि वह 2010 से कई वर्गों को दिए ओबीसी दर्जे को रद्द करने के आदेश को स्वीकार नहीं करेंगी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यायालय के फैसले को विपक्ष के लिए एक करारा तमाचा बताया।

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Calcutta High Court abolished OBC status many sections in West Bengal CM Mamata said order not accepted
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल में 2010 से कई वर्गों को दिए गए ओबीसी दर्जे को कलकत्ता हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से लोकसभा चुनाव के बीच राजनीतिक बहस छिड़ गई। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अदालत के आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह इस आदेश को स्वीकार नहीं करेंगी और इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को विपक्ष के लिए एक करारा तमाचा बताया। दावा किया कि इससे ओबीसी उप-कोटा के तहत मुसलमानों को आरक्षण देने की विपक्षी गठबंधन इंडिया की चाल का पर्दाफाश हो गया है। आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया का तुष्टीकरण का जुनून हर सीमा को पार कर गया है। 

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अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए बुधवार को न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की खंडपीठ ने कहा, वंचित वर्गों के नागरिकों की सेवाएं, जो पहले से ही सेवा में हैं या आरक्षण का लाभ ले चुके हैं। आदेश से राज्य की चयन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। 

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अदालत ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) अधिनियम, 2012 के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में दिए गए आरक्षण के लिए कई वर्गों को रद्द कर दिया।  पीठ ने निर्देश दिया कि 5 मार्च 2010 से 11 मई 2012 तक कई अन्य वर्गों को ओबीसी के रूप में वर्गीकृत करने वाले राज्य के कार्यकारी आदेशों को भी इस तरह के वर्गीकरण की सिफारिश करने वाली रिपोर्टों की अवैधता के मद्देनजर रद्द कर दिया गया था। 

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77 श्रेणियों को पिछड़ा चुना जाना मुस्लिम समुदाय का अपमान 


अदालत ने कहा, इन समुदायों को ओबीसी घोषित करने के लिए वास्तव में धर्म ही एकमात्र मानदंड प्रतीत होता है, अदालत का मानना है कि मुसलमानों की 77 श्रेणियों को पिछड़े के रूप में चुना जाना पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान है। उप-वर्गीकृत वर्गों को आरक्षण के प्रतिशत के वितरण के लिए 2012 के अधिनियम में एक प्रावधान को रद्द करते हुए, अदालत ने कहा, "ओबीसी-ए और ओबीसी-बी नामक दो श्रेणियों में सूचीबद्ध उप-वर्गीकृत वर्गों को हटा दिया गया है। 

2011 के बाद तृणमूल कांग्रेस ने संभाली सत्ता 
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने कहा कि 2010 के बाद पश्चिम बंगाल में ओबीसी के तहत सूचीबद्ध व्यक्तियों की संख्या पांच लाख से ऊपर होने की संभावना है। मई 2011 तक पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में था और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली। 
 

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