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West Bengal: डॉक्टर पर था दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात करने का आरोप, कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया दोषमुक्त करार

Fri, 09 Feb 2024 11:58 PM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: यशोधन शर्मा Updated Fri, 09 Feb 2024 11:58 PM IST
सार

अदालत ने तीन फरवरी को डॉक्टरों की एक टीम द्वारा महिला के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने पर नाराजगी व्यक्त की थी। 29 जनवरी को, न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी। साथ ही इस उद्देश्य के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का भी निर्देश दिया था।
 

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Cal HC absolves doc who violated order by terminating pregnancy of rape survivor
Calcutta High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर को दोषमुक्त कर दिया है। आरोप था कि उन्होंने तीन फरवरी को दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था को मेडिकल बोर्ड के गठन से पहले समाप्त कर दिया था। इसपर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। 

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क्या था स्पष्टीकरण
न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने बताया कि स्पष्टीकरण के अनुसार, गर्भवती की चिकित्सकीय स्थिति गंभीर थी और वह जबरदस्त प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जांच के दौरान गंभीर रक्तस्राव होने लगा था, जिसको देखते हुए, मरीज को राहत देने के लिए डॉक्टर को तुरंत चिकित्सा समाप्ति प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। डॉक्टर ने आगे बताया कि अगर वह ऐसे गंभीर हालातों में मेडिकल बोर्ड के गठन की प्रक्रिया का इंतजार करते तो पीड़िता की जान जोखिम में पड़ सकती थी। 
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 न्यायमूर्ति भट्टाचार्य डॉक्टर के इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट हो गईं। उन्होंने मामले के मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए कहा, 'चूंकि डॉक्टर ने मरीज, यानी याचिकाकर्ता, की जान बचाने के लिए सही काम किया, मुझे नहीं लगता कि कोई अवमाननापूर्ण कार्य या आदेश या गरिमा का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।' उन्होंने यह भी साफ किया कि कोर्ट इस मुद्दे पर डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

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ये है पूरा माजरा
दरअसल, अदालत ने तीन फरवरी को डॉक्टरों की एक टीम द्वारा महिला के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने पर नाराजगी व्यक्त की थी। 29 जनवरी को, न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी। साथ ही इस उद्देश्य के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का भी निर्देश दिया था।


इसके बावजूद पीड़िता को जब सरकारी एमआर बांगुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो संबंधित डॉक्टर मेडिकल बोर्ड का गठन किए बिना और कलकत्ता हाई कोर्ट को भी सूचित किए बिना सीधे गर्भावस्था को समाप्त कर दिया था। इसपर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ ने संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण की मांगा की कि अदालत के आदेश का उसकी भावना के अनुरूप पालन क्यों नहीं किया गया। लेकिन संबंधित डॉक्टर ने जो स्पष्टीकरण दिया उससे न्यायमूर्ति भट्टाचार्य संतुष्ट हो गए।



 

 

अदालत ने तीन फरवरी को डॉक्टरों की एक टीम द्वारा महिला के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने पर नाराजगी व्यक्त की थी। 29 जनवरी को, न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी। साथ ही इस उद्देश्य के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का भी निर्देश दिया था।
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