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CAG का खुलासा: मुंबई की सुरक्षा राम भरोसे, आतंकी घटनाओं से बेपरवाह है पुलिस

Sat, 12 Aug 2017 02:36 AM IST
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई Updated Sat, 12 Aug 2017 02:36 AM IST
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cag reports mumbai Police is relieved of terrorist incidents in the city
mumbai

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकवादी हमले के बाद मुंबई और महाराष्ट्र पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया है। पुलिस को आधुनिक उपकरण मुहैया कराने से लेकर उसकी तैयारियों के सिलसिले में केंद्र सरकार ने निधि दी, लेकिन पुलिस महकमा खर्च करने में ही कंजूस बना रहा।

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भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों रुपये दिए लेकिन, रकम खर्च नहीं किया गया। इससे केंद्र सरकार ने 265 करोड़ रुपये की निधि रोक दी।
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महाराष्ट्र विधानमंडल मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को कैग की रिपोर्ट दोनों सदनों में रखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य पुलिस के पास आधुनिक हथियारों की भारी कमी है। गत 5 साल में केंद्र सरकार ने अत्याधुनिक हथियार व उपकरण खरीदी के लिए 491. 96 रुपये दिए जिसमें से 289.46 करोड़ रुपये पुलिसकर्मियों को घर मुहैया कराने पर खर्च करना था,
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लेकिन उसमें से सिर्फ 83.70 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाया। आतंकी हमलों, नक्सली हमलों, दंगे और आंदोलनों के चलते पैदा होने वाली परिस्थितियों से निपटने से जुड़े साजों सामान खरीदने के लिए केंद्र सरकार ने 42.91 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन उस रकम में से राज्य सरकार 4.96  करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया।

सितंबर 2016 से पहले पुलिस को बुलेटप्रूफ जैकेट, नाइट विजन दूरबीन, बांब डिस्पोजेबल सूट, पोर्टेबल एक्सरे यंत्र जैसे अन्य उपकरण खरीदने थे, लेकिन पुलिस ने नहीं खरीदा। केंद्र की पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत साल 2011 से 2016 के बीच महज 38 फीसदी ही रकम खर्च किया जा सका।

हथियारों के अलावा महाराष्ट्र पुलिस तकनीकी कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रही है जिसके चलते इस साल जनवरी तक 34,171 यानी लगभग 18 फीसदी नमूनों की जांच तक नहीं की जा सकी।


कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि आधुनिक साजोसामान नहीं होने के कारण अपराध में भी बढ़ोतरी हुई है। राज्य सीआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार, बच्चों के अपहरण, डकैती, महिलाओं पर अत्याचार जैसे मामले बढ़े हैं। अगर निधि का सही इस्तेमाल किया गया होता तो अपराध पर रोक लगाई जा सकती थी।

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