पीएम मोदी के इस फार्मूले के तहत अटका पीयूष गोयल का प्रमोशन
बीते दिनों हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले पीएम मोदी ने दो महीने तक बारीक निगरानी की थी। इस दौरान सभी के कामकाज पर निगरानी रखी गई। इतना ही नहीं मंत्रियों और मंत्रालयों को श्रेणीबद्ध भी किया गया और टैलेट सेलेक्शन प्रॉसेस चलाया गया। जिसके तहत कई सासंदों का मूल्यांकन कर उनमें से 19 को मंत्री बनाया गया।
अंग्रेजी अखबार इकॉनमिक टाइम्स की खबर के अनुसार यह काम पार्टी और सरकार में पीएम के विश्ववसनीय लोगों की टीम ने यह काम किया था। जिस पर आखिरी फैसला पीएम मोदी का था। इस रिपोर्ट के मुताबिक पीएम ने अधिकारियों से कहा था कि संसद का मानसून सत्र शुरु होने और अफ्रीकी देशों की यात्रा के 10-12 दिन पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल में हो जाना चाहिए।
मंत्रियों को जिन पर मानकों पर परखा गया उसमें उनके कामकाज के साथ साथ ईमानदारी, सार्वजनिक छवि, स्टाफ और सहयोगियों के साथ रवैया और सरकार की सोच के मुताबिक काम करना और राज्यों से तालमेल शामिल था।
इसलिए हुआ स्मृति का डिमोशन
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार उन लोगों से पीएम मोदी ने बचना पसंद किया जो विवाद पैदा करने वाले बयान देते थे। उन्होंने उन लोगों को पसंद किया जो काम पर ध्यान दें। इसमें पीयूष गोयल, प्रकाश जावडेकर और मनोज सिन्हा शामिल थे।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीयूष गोयल को कैबिनेट रैंक मिल सकती थी लेकिन आखिरी फैसला यह किया गया कि उन्हें उर्जा से जुडे़ सभी मंत्रालयों का प्रभारी बनाया जाए ताकि उनके कौशल का बेहतर उपयोग हो पाए। अधिकारी ने यह भी बताया कि कुछ मंत्रियों को बेहतर नेता तो पाया गया लेकिन यह देखा गया कि उनके पास जो मंत्रालय थे वो उनके मुताबिक नहीं थे।
यही वजह बताई जा रही है कि स्मृति इरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय छीन कर कपड़ा मंत्रालय थमा दिया गया। साथ ही रविशंकर को दूरसंचार से कानून, बीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास से स्टील और वैंकेया नायडू को संसदीय कार्य से हटाकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दिया गया।
Published By Rahul Sankrityayan