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CAA: 'नागरिकता संशोधन कानून के नियम लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आ जाएंगे'; गृह मंत्रालय के अधिकारी का बड़ा बयान

Tue, 02 Jan 2024 06:33 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 02 Jan 2024 06:33 PM IST
सार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नियमों को लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सीएए के नियम लोकसभा चुनाव 2024 से काफी पहले अधिसूचित कर दिए जाएंगे। संशोधन के बाद कानून 2019 में बनाए गए थे।

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CAA Rules Notification Before Lok Sabha Elections 2024 Home Ministry Official
गृह मंत्री अमित शाह (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नियम जारी करने में हो रही देरी के कारण गृह मंत्रालय कठघरे में है। ताजा घटनाक्रम में गृह मंत्रालय के अधिकारी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के नियमों की अधिसूचना जारी करने के बारे में अहम बयान दिया है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि लोकसभा चुनाव की घोषणा से 'काफी पहले' नियम अधिसूचित कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, सरकार जल्द ही सीएए के लिए नियमावली जारी करेगी।
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चुनाव की घोषणा से काफी पहले नियम अधिसूचित हो जाएंगे
गृह मंत्रालय के इस वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि एक बार नियम जारी होने के बाद, कानून लागू किया जा सकेगा। नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद नियमों के तहत पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता भी दी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि चार साल से अधिक की देरी के बाद, सीएए के कार्यान्वयन के लिए नियम जरूरी हैं। क्या इस कानून के नियम अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले अधिसूचित हो जाएंगे? इस सवाल पर वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, 'हां, चुनाव के एलान से काफी पहले नियम जारी कर दिए जाएंगे।
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पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, गृह मंत्री ने खुद जताई है प्रतिबद्धता
अधिकारी ने कहा, नियम तैयार हैं और ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। आवेदकों को वह साल बताना होगा, जब उन्होंने यात्रा दस्तावेजों के बगैर भारत में प्रवेश किया था। आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। गौरतलब है कि विगत 27 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कानून के कार्यान्वयन को लेकर कोलकाता में बयान दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। शाह के मुताबिक सीएए को लागू करना भाजपा की प्रतिबद्धता है। सीएए का कार्यान्वयन कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि यह देश का कानून है।
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कानून को लेकर क्या हैं संसदीय नियम?
गौरतलब है कि संसदीय नियमावली के अनुसार, किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के भीतर तैयार हो जाने चाहिए। ऐसा न होने पर लोकसभा और राज्यसभा में अधीनस्थ विधान समितियों से और समय मांगने का भी प्रावधान है। नियम बनाने के लिए साल 2020 के बाद गृह मंत्रालय नियमित अंतराल पर कई संसदीय समितियों से एक्सटेंशन लेता रहा है। 

विरोध के दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत पर विवाद
संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। विरोध में देश के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। विरोध प्रदर्शन या पुलिस की कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। 

नागरिकता देने के मामले में भारत के 11 राज्यों का हाल
गृह मंत्रालय के मुताबिक नौ राज्यों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जा सकती है। इनमें  गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन नौ राज्यों के 30 से अधिक जिला मजिस्ट्रेटों और गृह सचिवों को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत अधिकार दिए गए हैं। इन जिलों के अधिकारियों को अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दी गई हैं।


असम और पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है। इन दो राज्यों के किसी भी जिले के अधिकारियों को अब तक नागरिकता देने के अधिकार नहीं दिए गए हैं। वर्ष 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय ने आठ महीने में (अप्रैल-दिसंबर, 2021) कुल 1,414 विदेशियों को भारतीय नागरिकता दी। इसके लिए पंजीकरण या देशीयकरण (registration or naturalization) सिद्धांत का सहारा लिया गया।
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