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पंजाब में 44.5 प्रतिशत बढ़ा पराली जलाना, एनसीआर के 29 सौ उद्योग प्रदूषण फैला रहे
Thu, 04 Feb 2021 04:06 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 04 Feb 2021 04:06 AM IST
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पराली जलाते किसान
- फोटो : पीटीआई
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देश में जहां प्रदूषण रोकने के लिए कड़े प्रयास हो रहे हैं, वहीं पंजाब में बीते साल पराली जलाने की घटनाएं 44.5 प्रतिशत बढ़ गई। एनसीआर में भी प्रदूषण फैला रहे आधे उद्योगों ने ही पीएनजी को ईंधन के तौर पर अपनाया, अब भी करीब 2900 उद्योग प्रदूषण फैला रहे हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को हलफनामे में यह जानकारी दी है।
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वायु प्रदूषण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंत्रालय ने बताया कि पंजाब में 2020 में पराली जलाने की 76,590 घटनाएं दर्ज हुईं, यह 2019 में 52,991 थी। हरियाणा में भी ऐसी घटनाएं 25 प्रतिशत बढ़कर पांच हजार से 6,652 पहुंच गईं।
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मंत्रालय के अनुसार कृषि व किसान कल्याण विभाग ने 2019 से 2021 के लिए योजना बनाई, जिसके तहत पराली के प्रबंधन के लिए मशीनें खरीदने पर सब्सिडी दी जा रही है। इसके तहत 1726.67 करोड़ रुपये जारी हुए, जिसमें से 793.18 करोड़ यानी 46 प्रतिशत पंजाब को दिए गए।
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वहीं हरियाणा को 499.90 करोड़, यूपी को 374.08 करोड़, दिल्ली को 4.52 करोड़ और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सहित अन्य एजेंसियों को 54.99 करोड़ रुपये दिए गए। एनसीआर में वायु प्रदूषण पर निगरानी के लिए आयोग बनाया गया, जिसने कई सख्त कदम उठाए।
सभी उद्योग नहीं अपना रहे स्वच्छ ईंधन
उद्योगों को स्वच्छ ईंधन उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है। एनसीआर में 6,042 उद्योगों की पहचान की गई थी, जिनके द्वारा उपयोग हो रहे पारंपरिक ईंधन से वायु प्रदूषण फैल रहा है। इनमें से 3,138 ने ही जनवरी 2021 तक पीएनजी को ईधन के रूप में अपनाया है। हरियाणा में 2,220, यूपी में 420 और राजस्थान में 151 उद्योगों को भी ईंधन बदलने के लिए कहा गया है।
पुरानी गाड़ियां सड़कों से हटानी होंगी
कोर्ट को मंत्रालय ने बताया कि 10 और 15 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन अब भी सड़कों पर चल रहे हैं। इन्हें हटाने के लिए यातायात विभाग चालान काट रहा है। लेकिन इन वाहनों को तत्काल रोकने और सड़कों से हटाने की जरूरत है ताकि वातावरण में सुधार आ सके।