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31 जनवरी से शुरू होगा संसद का बजट सत्र, एक हाथ से देकर दूसरे हाथ से पैसे निकालेंगी वित्त मंत्री

Wed, 15 Jan 2020 08:54 PM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 15 Jan 2020 08:54 PM IST
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Budget session of Parliament start from 31 January, President will tell about agenda of government
nirmala sitharaman - फोटो : ANI

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने 31 जनवरी से संसद के बजट सत्र की बैठक बुलाई है। बजट सत्र के तीन अप्रैल 2020 तक जारी रहने की संभावना है। एक फरवरी को केन्द्र सरकार बजट पेश करेगी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की खुशहाली का संकेत देते हुए एक हाथ से जनता को आर्थिक राहत देकर दूसरे हाथ से पैसे निकालेंगी। हालांकि देश के आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बजट से अभी बहुत उम्मीद न की जाए, क्योंकि सरकार के हाथ बहुत तंग हैं। वहीं भाजपा के नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार-2 के सत्ता में आने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट काफी अच्छी सौगातें लेकर आएगा।

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परंपरा के अनुसार हर साल संसद का पहला सत्र राष्ट्रपति संबोधित करते हैं। संसद के केन्द्रीय कक्ष में राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति अपनी सरकार के कामकाज, उसकी दशा-दिशा तथा भावी एजेंडे की रुपरेखा रखते हैं। इस बार भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 31 जनवरी को दिन में 11 बजे संसद के संयुक्त सदन को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण काफी अहम माना जा रहा है।
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सीएए और एनपीआर के विरोध में अहम होगा राष्ट्रपति का अभिभाषण
31 जनवरी को राष्ट्रपति का अभिभाषण काफी अहम होगा। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून-2019 को देश भर में संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया है। इसके साथ-साथ केन्द्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (एनपीआर) और जनसंख्या के सांख्यिकीय आंकड़े जुटाने को मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया शुरू हो रही है। नागरिकता कानून और जनसंख्या पंजीकरण को लेकर देश के तमाम हिस्सों में विरोध हो रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग में भी महिलाएं सत्याग्रह कर रही हैं। असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य की सरकार इसका विरोध कर रही हैं। कई राज्य अपने यहां इसे न लागू करने की आवाज उठा रहे हैं। समझा जा रहा है कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद अपने अभिभाषण में इस पर प्रकाश डालेंगे।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार-2 ने जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव किया है। अनुच्छेद 370 को राज्य से हटाया, स्वतंत्र राज्य के दर्जे को समाप्त किया है और लद्दाख, जम्मू-कश्मीर को नया केन्द्र शासित प्रदेश बनाया है। सरकार ने यह बदलाव संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद किया है। समझा जा रहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसे भी स्थान मिल सकता है।

तीसरा बड़ा मुद्दा देश के तमाम विश्वविद्यालयों में छात्रों के विरोध की स्थिति की है। दिल्ली के दो बड़े विश्वविद्यालयों के छात्र भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू में फीस वृद्धि के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुआ तो जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बिना कुलपति की अनुमति के प्रवेश कर पुलिस ने छात्रों पर कार्रवाई की। विश्वविद्यालय की कुलपति खुद इसको लेकर असहज हैं। समझा जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी राष्ट्रपति प्रकाश डाल सकते हैं। देश के छात्रों से संयम बरतने, देश के विकास में योगदान देने की अपील कर सकते हैं।

राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सैन्य कमांडर हैं। केन्द्र सरकार ने तीनों सेनाओं में समन्य स्थापित करने, तालमेल बढ़ाने के लिए बहुप्रतीक्षित चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति करते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को यह पद दिया है। राष्ट्रपति इस पर भी अपनी राय दे सकते हैं।

बजट में कितना कर पाती है सरकार?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 2019-2024 के कार्यकाल में भारत को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। ऐसे में एक फरवरी को केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया जा रहा बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए बड़ी चुनौती है। देश उच्च बेरोजागी के दौर से गुजर रहा है। औद्योगिक उत्पादन, रीयल स्टेट, अच्छा संकेत नहीं दे रहे हैं। सरकार का राजस्व भी अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। राजकोषीय घाटा नई चेतावनी है। तमाम सरकारी विभाग और राज्य अपनी योजना, कार्यक्रमों के परिचालन में अधिक बजट की मांग कर रहे हैं।


आयकरदाता, घरेलू उद्योग, लघु, मझोले उद्योग, किसान, मजदूर, गांव सब अपने लिए राहत की उम्मीदें संजोए हैं। जीएसटी अब भी केन्द्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। बीएसएनएल, एमटीएनएल, एयर इंडिया, रेलवे जैसे संस्थान, देश के शिक्षण संस्थान सभी की उम्मीदें हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह के हालात में अभी वित्त मंत्री से कोई बड़ी जादूगरी की उम्मीद करना बेमानी होगी। फिर भी देखना है कि वित्त मंत्री लोगों की उम्मीद पर कितना खरा उतर पाती हैं।

 

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