2017 के लिए बसपा का नया प्लान, हर दिल से जुड़ने की बनाई रणनीति
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बहुजन समाज पार्टी 2017 के लिए अब हर घर नहीं हर दिल से जुड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही हैजिस क्षेत्र में जिस जाति की तादाद ज्यादा उसी जाति के बसपा नेता को वहां बैठक करने भेजा जाएगा। ये बैठकें क्षेत्रवार होने वाली बैठकों के समानांतर होंगी।
बहुजन समाज पार्टी विरोधी दलों को पछाडने के लिए लगातार संगठन में बदलाव केसाथ प्रचार के तरीकेको बदल रही है। बसपा ने अपने बूछ मैनेजमेंट को पहले मजबूत किया। उसके बाद हर घर दस्तक देकर पार्टी से जोडने की मुहिम छेड़ी। इसके लिए कार्यकर्ता, पार्टी की रीढ़ बामसेफ केसदस्यों को लगाया हुआ है।
पार्टी ने अब हर दस्तक की जगह हर दिल से जुडने की सोची है। बसपा ने तय किया है कि गोपनीय तरीकेसे हर विधानसभा क्षेत्र में वो स्थान चिनहित किए जाएंगे, जहां एक जाति विशशेष की तादाद ज्यादा है।
इस स्थान को चिन्हित करने के बाद वहां के लोगों से सीधे संवाद करने पार्टी के उसी जति के नेता को भेजा जाएगा। जो आमजन को पार्टी की खूबियों और विरोधी दलों की खामियों को सामने रखेगा। बसपा ने हाल में संगठन में किए बदलाव में मुख्य जोनल कोर्डिनेटर, जोनल कोर्डिनेटर, जिला संयोजक, जिला प्रभारी बनाए।
जोनल कोर्डिनेटर और जिला प्रभारी को एक एक विधानसभा क्षेत्र में जीत दिलाने के लिए जिम्मा सौंपा है। इस काम में पार्टी ने ज्यादाकर अपने कैडर केलोगों को लगाया है।
मुस्लिम को खास तरजीह नहीं, हो सकती है दिक्कत
दरअसल बसपा इस बार का चुनाव दलित मुसलिम और पिछड़ों के बल पर लडने की रणनीति पर चल रही है। लेकिन संगठन में हाल में किए गए बदलाव में पूरी तरह दलितों पर विश्वास जताया है।
साथ में कुछ पिछड़ों को भी जिम्मा सौंपा है, लेकिन जोनल और जिला स्तर पर बनाए गए कोर्डिनेटरों में मुसलिमों को जिम्मेदारी नहीं दी गई है। यह पूरे यूपी में हुआ है। लोगों का मानना है कि इससे गलत संदेश जा सकता है और पार्टी के लिए आगे परेशानी खड़ी हो सकती है।