फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BSF destroys 153 Pakistani drones that entered Punjab

BSF: माहौल खराब करने से बाज नहीं आ रहा पड़ोसी, बीएसएफ ने किया पंजाब में घुसे 153 पाकिस्तानी ड्रोन का खात्मा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 30 Sep 2024 04:20 PM IST
विज्ञापन
सार
BSF: बीते नौ महीने में बीएसएफ ने पंजाब की सीमा में 153 पाकिस्तानी ड्रोन जब्त किए हैं। खास बात है कि अधिकांश ड्रोन, चीन निर्मित हैं। इसके अलावा 190 किलोग्राम हेरोइन, 29 हथियार और 400 राउंड गोला बारूद बरामद किया गया है।
loader
BSF destroys 153 Pakistani drones that entered Punjab
drone new - फोटो : istock

विस्तार

आतंकी संगठनों व तस्करों की मदद से पंजाब में ड्रोन के जरिए हथियार, कारतूस व ड्रग्स के पैकेट गिराकर माहौल खराब करने की हरकतों से 'पड़ोसी' मुल्क यानी पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है। बीते नौ महीने में बीएसएफ ने पंजाब की सीमा में 153 पाकिस्तानी ड्रोन जब्त किए हैं। खास बात है कि अधिकांश ड्रोन, चीन निर्मित हैं। इसके अलावा 190 किलोग्राम हेरोइन, 29 हथियार और 400 राउंड गोला बारूद बरामद किया गया है। बीएसएफ ने संदिग्ध गतिविधियों के चलते बॉर्डर पर 153 व्यक्तियों, जिनमें 126 भारतीय और 25 पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं, को गिरफ्तार किया है। जब्त किए गए अधिकांश ड्रोन, क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेविक 3 क्लासिक, मेड इन चाइना) और क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेट्रिस 300 आरटीके, मेड इन चाइना) सीरिज के रहे हैं। 



हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला को खत्म कर रही बीएसएफ  
बीएसएफ के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सीमा सुरक्षा बल की मजबूत, बहुआयामी रणनीति का प्रमाण है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से आने वाली दवाओं और हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला को खत्म करना है। सीमाओं पर बढ़ी हुई सतर्कता, अत्याधुनिक तकनीक के रणनीतिक उपयोग और सीमावर्ती समुदायों के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से, बीएसएफ ने अवैध गतिविधियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय ने बीएसएफ के प्रयासों को और मजबूत किया है, जिससे ट्रैकिंग, अवरोधन और खतरों को बेअसर करने में निर्बाध संचालन सुनिश्चित हुआ है।


ड्रोन को बनाया जाता है ब्लिंकर रहित  
सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकने में हासिल हुई सफलताएं न केवल बीएसएफ के संचालन की दक्षता को उजागर करती हैं, बल्कि राष्ट्र की शांति और सद्भाव की रक्षा के लिए इसके दृढ़ संकल्प को भी मजबूत करती हैं। लगातार विकसित हो रहे खतरों से आगे रहकर और अपनी रणनीतियों को अपनाकर, बीएसएफ भारत की सीमाओं की सुरक्षा को अस्थिर करने के किसी भी प्रयास को विफल करने में अहम भूमिका निभा रहा है। बीएसएफ द्वारा बरामद किए गए सभी ड्रोन चीन निर्मित हैं। हालांकि पाकिस्तान को पहले भी चीन से ड्रोन मिलते रहे हैं। चीन निर्मित ड्रोन को पाकिस्तान में असेंबल किया जाता है। पाकिस्तान में इन ड्रोन को ब्लिंकर रहित बनाया जाता है। ड्रोन में आवाज भी ज्यादा नहीं आती। 

25 हजार एमएच की बैटरी वाले ड्रोन भी
अधिकांश ड्रोन, क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेविक 3 क्लासिक, मेड इन चाइना) और क्वाडकोप्टर (मॉडल डीजेआई मेट्रिस 300 आरटीके, मेड इन चाइना) सीरिज के हैं। बीएसएफ ने कई बड़े साइज के ड्रोन भी बरामद किए हैं। इनमें 25 हजार एमएच की बैटरी लगी होती है। इनकी मदद से 20-25 किलोग्राम वजन, सीमा पार गिराया जा सकता है। अब ड्रोन का फ्लाइंग टाइम भी बढ़ाया गया है। केंद्रीय एजेंसियों के मुताबिक, हमारी बॉर्डर गार्डिंग फोर्स पूरी तरह सतर्क है। कुछ क्षेत्रों में तकनीक के जरिए ड्रोन को गिराने या उसे जाम करने का सिस्टम तैयार किया जा रहा है। बहुत जल्द यह सिस्टम, पंजाब, जम्मू कश्मीर, असम, गुजरात, राजस्थान और उत्तर पूर्व के राज्य, जिनकी सीमा अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से टच करती है, वहां पर लगाया जाएगा। हथियार और ड्रग्स को पीली रेडियम टेप से तैयार किए गए एक बॉक्स में पैक किया जाता है। इस बॉक्स को ड्रोन के साथ अटैच किया जाता है। पीली टेप की वजह से अंधेरे या खराब मौसम में वह ड्रोन, साफ नजर आता है। सर्दियों में कोहरे या धुंध के चलते बॉर्डर के इलाकों में बीएसएफ द्वारा गश्त बढ़ा दी जाती है। बॉर्डर के आसपास बीएसएफ एवं दूसरी एजेंसियों द्वारा मानवीय इंटेलिजेंस नेटवर्क का दायरा बढ़ाया जा रहा है। 

मुखौटे वाले स्नाइपर और बॉर्डर एक्शन टीम
सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी आईएसआई और उसके गुर्गे आतंकी संगठन, भारतीय सीमा में लगातार घुसपैठ करने का प्रयास करते रहते हैं। हालांकि अधिकांश मौकों पर भारतीय सुरक्षा बल, घुसपैठ को असफल कर देते हैं। मौजूदा समय में बॉर्डर पर सीजफायर होने के बावजूद पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और आईएसआई के साथ मिलकर आतंकियों की घुसपैठ कराती है। लगभग डेढ़ दशक से पाकिस्तानी सेना ने मुखौटे वाले स्नाइपर और बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) को सीमा के आसपास तैनात कर रखा है। बैट में आतंकी संगठनों के सदस्य शामिल होते हैं। इन्हें पाकिस्तानी सेना की ओर से एक तय राशि दी जाती है। अगर ये भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में कामयाब रहते हैं तो कुछ इन्सेटिव मिलता है। भारतीय सेना या बीएसएफ की जवाबी फायरिंग में ये लोग मारे जाते हैं तो इन्हें शहीद का दर्जा और आर्थिक मदद भी मिलती है। पाकिस्तान में सम्मान के साथ इनका अंतिम संस्कार होता है। 

पाकिस्तान को चीन से मिलते हैं सस्ती दरों पर पुर्जे 
पाकिस्तान की तरफ से जम्मू कश्मीर और पंजाब में हथियार व ड्रग्स के पैकेट लेकर आने वाले 'ड्रोन' की संख्या में एकाएक तेजी आ गई है। पहले सप्ताह में एक-दो ड्रोन आते थे, अब एक ही दिन में कई ड्रोन आने लगे हैं। पाकिस्तान से लगते बॉर्डर के विभिन्न हिस्सों पर इस साल अभी तक डेढ़ सौ से अधिक ड्रोन जब्त हो चुके हैं। पाकिस्तान एक साथ '3600' ड्रोन को कंट्रोल करने का फार्मूला चीन से लेने का प्रयास कर रहा है। बॉर्डरमैन, इंस्टीट्यूट ऑफ बॉर्डर सिक्योरिटी स्ट्डीज के फाउंडिंग डायरेक्टर, प्रोफेसर आईआईटी दिल्ली एवं एडवाइजर आईआईटी मुंबई, डॉ. आरके अरोड़ा का मानना है कि पाकिस्तान से भारत में भी जितने भी ड्रोन आते हैं, वे ज्यादातर असेंबल किए होते हैं। पाकिस्तान को चीन से सस्ती दरों पर पुर्जे मिल जाते हैं। इन्हें पाकिस्तान में जोड़ कर ड्रोन तैयार किया जाता है। चाइनीज पुर्जो के जरिए डेढ़ से दो लाख रुपये में एक ड्रोन तैयार हो जाता है। पंजाब सेक्टर में बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अनेक ड्रोन 'क्वाडकोप्टर डीजेआई मेट्रिक्स 300आरटीके सीरिज' के रहे हैं। ड्रोन का फ्लाइंग टाइम और भार सहने की क्षमता पर कीमत तय होती है। अगर साल में सौ ड्रोन भी मार गिराए जाते हैं तो इनकी कीमत 3 करोड़ रुपये होती है। 

आसान काम नहीं, फायरिंग के जरिए ड्रोन गिराना
भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के विकसित देश भी ड्रोन को मार गिराने की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 'एआई' तकनीक पर काम कर रहे हैं। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के पास घातक ड्रोन तो हैं, लेकिन ड्रोन को आने से रोकना या उसे तकनीक के जरिए मार गिराना, ये अभी तक सौ फीसदी संभव नहीं हो सका है। भारत में भी ऐसा तकनीकी सिस्टम विकसित करने पर काम चल रहा है। एंटी ड्रोन तकनीक, टनल का पता लगाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सर्विलांस, इसके लिए बीएसएफ 'इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय' के साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसे 'बीएसएफ हाईटेक अंडरटेकिंग फॉर मैक्सिमाइजिंग इनोवेशन' (भूमि) का नाम दिया गया है। अभी जैमर लगाने वाला सिस्टम है, लेकिन ड्रोन की रेंज भांपकर उसकी फ्रीक्वेंसी बदल दी जाती है। इससे जैमर काम नहीं करता। फायरिंग के जरिए ड्रोन को गिराना, ये कोई आसान काम नहीं है। रात और धुंध में ड्रोन दिखाई ही नहीं पड़ता। ऐसे में सैंकड़ों फायर खाली चले जाते हैं। 

रडार प्रणाली की पहुंच से दूर हैं क्वार्ड कॉप्टर ड्रोन
इंडियन स्पेस एसोसिएशन के डीजी ले.जनरल (रि) एके भट्ट ने एक कांफ्रेंस में कहा था, आर्मी, एयरफोर्स, बीएसएफ और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के पास अभी ऐसे तकनीकी उपकरणों का अभाव है,  जिनकी मदद से ड्रोन को समय रहते गिराया जा सकता है। क्वार्ड कॉप्टर जैसे छोटे साइज वाले ड्रोन मौजूदा रडार प्रणाली की पहुंच से दूर हैं। छोटे ड्रोन का झुंड हो तो भी पता नहीं लगता, बड़ा ड्रोन ही रडार की जद में आ सकता है। ड्रोन काउंटर के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना होगा। चीन अपने मिलिट्री ड्रोन के जरिए जल, थल और वायु सटीक सर्विलांस करता है। इसके लिए उसने 72 सेटेलाइट तैयार किए हैं। युद्ध पोतों पर उसकी नियमित नजर रहती है। पाकिस्तान के पास बायरकटार टीबी-2 ड्रोन, चीन निर्मित डीजेआई मैट्रिस-300, सीएच-4 यूसीएवी, अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (यूसीएवी) भी हैं, इसके मद्देनजर भारत को अपना एंटी ड्रोन सिस्टम तैयार करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed