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ब्रिक्स 2026: भारत सजा रहा है शिखर सम्मेलन का मंच, 12-13 सितंबर को बड़ा संदेश देने की तैयारी

Tue, 25 Aug 2026 06:21 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:21 PM IST
सार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 दिल्ली स्थित भारत मंडमपम में होना है। इसमें भाग लेने के लिए शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आएंगे। इससे पहले 11-12 अक्तूबर 2019 को जिनपिंग भारत आए थे। इस बार भी जिनपिंग के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल दौरे पर आ सकता है। 

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BRICS Summit 2026 India Bharat Mandapam Delhi China President Xi Jinping news and updates
ब्रिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एनएसए अजीत डोभाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश लेकर चीन में हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को प्रधानमंत्री मोदी का संदेश दे दिया है। दोनों नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। ऐसी सूचना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के जरिए भारत बड़ा संदेश देने की तैयारी कर रहा है।
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पूर्व विदेश सचिव शशांक को भी ब्रिक्स 2026 से कुछ सकारात्मक नतीजा निकलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। उससे पहले शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन होगा। शशांक को लग रहा है इसकी रूपरेखा एससीओ से भी मिल सकती है। दरअसल 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत कर रहा है। ब्रिक्स के 11 सक्रिय सदस्य देश हैं। इस सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के भी आने की उम्मीद है। इस सम्मेलन में करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष/उनके प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की संभावना है। भारत इस दौरान रूस के साथ-साथ रणनीतिक स्वायत्तता को ध्यान में रखकर चीन से संबंधों का ‘फ्लेवर’ देना चाहता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत रखना है। माना जा रहा है कि सितंबर के पहले सप्ताह तक प्रधानमंत्री के साथ शिखर नेताओं की प्रस्तावित शिखर वार्ता का प्रारुप अंतिम रूप ले लेगा और उसके बाद तस्वीर साफ होने लगेगी।    
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भारत मंडमपम में सजेगा मंच
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 दिल्ली स्थित भारत मंडमपम में होना है। इसमें भाग लेने के लिए शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आएंगे। इससे पहले 11-12 अक्तूबर 2019 को जिनपिंग भारत आए थे। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद 4-5 दिसंबर को चीन की यात्रा की थी। शी जिनपिंग के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। ताकि भारत और चीन के बीच में द्विपक्षीय वार्ता के बाद समझौता/ सहमति के आधार पर भरोसे की बुनियाद मजबूत की जा सके। रूस के साथ रक्षा, अंतरिक्ष, विज्ञान के अलावा अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी तरह से ईरान में भारत की चाबहार बंदरगाह को लेकर उम्मीदें हैं। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, इथियोपिया, मिस्र  भी हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोल्विया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलयेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, विएतनाम ब्रिक्स के साझीदार देश हैं। इस तरह से ब्रिक्स दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधत्व करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक मंच से तकनीकी आर्थिक लचीलापन बढ़ाने की वकालत करते हैं। नवाचार को प्रोत्साहन देना, विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के हित को संरक्षित रखना भारत अपना मूल दायित्व समझता है। माना जा रहा है कि बदलती वैश्विक परिस्थिति में ब्रिक्स 2026 का फोरम संतुलित बहुध्रुवीय दुनिया की अवधारणा को भी काफी मजबूती देगा।
 

भारत-चीन-रूस शुरू हुए ब्रिक्स ने लिया बड़ा आकार  
पहले भारत और रूस आपसी सहयोग, सामंजस्य और भरोसा बढ़ाने के लिए वार्षिक शिखर सम्मेलन करते थे। बाद में भारत-रूस और चीन के बीच में त्रिपक्षीय फोरम आरआईसी बना। 16 जून 2009 को रूस में पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हुए। अब इसका दायरा 11 सक्रिय सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। ब्रिक्स की जीडीपी अब जी-7 देशों के समूह की जीडीपी से आगे निकल चुकी है। पश्चिम के देशों और डॉलर में व्यापार-कारोबार के जवाब में अब ब्रिक्स के कई महत्वपूर्ण सदस्य देश स्थानीय मुद्रा या ब्रिक्स की मुद्रा में व्यापार शुरू करने पर जोर दे रहे हैं। ब्रिक्स देशों की इस योजना से अमेरिका भी चौंकता है। उसे अपने डॉलर के कमजोर होने का खतरा दिखाई देने लगता है। ऐसा हुआ तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के एकाधिकार को चुनौती मिलने लगेगी।
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