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Maharashtra: सीमा विवाद पर विधानसभा में प्रस्ताव पास, शिंदे बोले- महाराष्ट्र में शामिल हों कर्नाटक के 865 गांव

Tue, 27 Dec 2022 06:15 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 27 Dec 2022 06:15 PM IST
सार

फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर नाम लिए बगैर पलटवार करते हुए कहा, 'मैं हैरान हूं कि जो लोग कल बोल रहे थे, उन्होंने 2.5 साल सीएम रहते हुए क्यों कुछ नहीं किया। सीमा विवाद हमारी सरकार बनने के बाद पैदा नहीं हुआ है।' 

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Border Dispute: Maharashtra CM will move resolution in assembly Today, border dispute News and all updates in
एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र व कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को सदन में सर्वसम्मति से पास किया गया। उन्होंने कहा, किसी भी परिस्थिति में कर्नाटक के बेलगाम, कारवार, निपानी, भालकी, बीदर शहरों के 865 मराठी भाषी गांवों को शामिल करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।

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शिंदे ने कहा, केंद्र सरकार को केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक में लिए गए निर्णय को लागू करने के लिए कर्नाटक सरकार से अपील करना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी लोगों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए। 
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इससे पहले डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उम्मीद जताई थी कि यह प्रस्ताव बहुमत से पारित होगा। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना नेता व पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया। 
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फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर नाम लिए बगैर पलटवार करते हुए कहा, 'मैं हैरान हूं कि जो लोग कल बोल रहे थे, उन्होंने 2.5 साल सीएम रहते हुए क्यों कुछ नहीं किया। सीमा विवाद हमारी सरकार बनने के बाद पैदा नहीं हुआ है।' 
 


फडणवीस ने कहा कि यह विवाद महाराष्ट्र के गठन और भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के समय शुरू हुआ था। यह सालों से चला आ रहा विवाद है। हम इस मामले में कभी राजनीति नहीं करते हैं और उम्मीद करते हैं कि कोई भी इस पर राजनीति न करे। फडणवीस ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को महसूस करना चाहिए कि समूचा महाराष्ट्र उनके साथ है।

बता दें, सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना बाला साहेब ठाकरे गुट के नेता उद्धव ठाकरे ने सीमा विवाद को लेकर शिंदे की चुप्पी पर सवाल उठाया था। इसके साथ ही उन्होंने यह विवाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा हल किए जाने तक कर्नाटक के विवादित क्षेत्रों को 'कर्नाटक के कब्जे वाला महाराष्ट्र'  (KOM) करार देते हुए केंद्र सरकार से इस इलाके को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने मांग की कि यह मांग महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव में शामिल की जाना चाहिए। 

उद्धव की मांग पर अजित पवार ने कही यह बात
इस बीच, राकांपा नेता व महाराष्ट्र के विपक्षी नेता अजित पवार ने कहा कि हमें सीमा विवाद को लेकर लाए जा रहे प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। हम हमारी राय रखेंगे। हम सीमावर्ती महाराष्ट्रीयन लोगों के साथ हैं। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो विवादित क्षेत्र को केंद्र सरकार संघ शासित घोषित कर सकती है या नहीं। 

विपक्षी विधायकों ने मराठी लोक गीत गाकर किया प्रदर्शन
इस बीच, नागपुर विधान भवन की सीढ़ियों पर विपक्षी विधायकों ने आज अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने परंपरागत मराठी लोकगीत गाते हुए राज्य सरकार की नीतियों, कथित धांधलियों और शिंदे सरकार के मंत्रियों के कथित भ्रष्टाचार का जिक्र किया। 

देखें वीडियो
 

 

शिंदे व सत्तार के इस्तीफे की मांग, 'वारकरी' अंदाज में मार्च
महाराष्ट्र विधानसभा के नागपुर स्थित दोनों सदनों में आज विपक्ष ने सीएम एकनाथ शिंदे और मंत्री अब्दुल सत्तार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। विपक्षी विधायकों ने 'वारकरी' अंदाज में विरोध मार्च भी निकाला। मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा के विपक्ष के सदस्यों ने हाथों में झांझ मंझीरे लेकर मराठी में लोक गीत व भजन गाते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कृषि मंत्री सत्तार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पिछली महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में मंत्री रहते हुए चरनोई की भूमि निजी लोगों के नाम कर दी थी। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने सत्तार को पिछले सप्ताह नोटिस दिया है।

इसी तरह विपक्ष ने सीएम एकनाथ शिंदे के भी इस्तीफे की मांग की। नागपुर में गरीबों के लिए आरक्षित जमीन निजी लोगों को आवंटित करने के इस मामले में 14 दिसंबर को नागपुर पीठ ने यथास्थिति के आदेश दिए हैं। यह आवंटन शिंदे ने तब किया था, जब वे पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री थे। मामले में सीएम शिंदे ने आरोपों का खंडन किया है। हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर को उन्हें राहत देते हुए केस खत्म कर दिया, क्योंकि राज्य सरकार ने आवंटन आदेश रद्द कर दिया। 

विवादित क्षेत्र केंद्र शासित प्रदेश घोषित हो: उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमने आज के संकल्प का समर्थन किया है। महाराष्ट्र के पक्ष में जो भी होगा, हम उसका समर्थन करेंगे। लेकिन कुछ सवाल हैं। दो साल से अधिक समय से लोग (सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले) उन्हें महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, हम उसके बारे में क्या कर रहे हैं। आज सरकार ने जवाब दिया कि विवादित क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश घोषित नहीं किया जा सकता जैसा कि 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था। हालांकि, स्थिति अब वैसी नहीं है। कर्नाटक सरकार इसका पालन नहीं कर रही है। वे वहां विधानसभा सत्र कर रहे हैं, जिसका नाम बेलगावी रखा गया है। इसलिए हमें  सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए और इसे केंद्रशासित प्रदेश  घोषित करने के लिए कहना चाहिए।

ठंडे बस्ते में पड़ी अलग विदर्भ राज्य की मांग
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के कारण अलग विदर्भ राज्य की करीब सौ साल पुरानी मांग अब ठंडे बस्ते में पड़ गई है। कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद नागपुर में हो रहे शीतकालीन सत्र में पृथक विदर्भ का मुद्दा लगभग गायब हो गया है। संयुक्त महाराष्ट्र का हिस्सा बनने के बाद नागपुर महाराष्ट्र की उप राजधानी बनी। 28 सितंबर 1953 में हुए नागपुर करार के तहत हर साल महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र नागपुर में होता है।



पहले अलग विदर्भ राज्य के मुद्दे पर लगातार मोर्चे और प्रदर्शन होते रहे हैं। इस बार भी सत्र के दूसरे दिन पूर्व विधायक बामनराव चटप के नेतृत्व में एक छोटा मोर्चा निकला, लेकिन इसकी गूंज सदन में नहीं सुनाई पड़ी। शुरुआत में विदर्भ में आठ जिले संयुक्त महाराष्ट्र का हिस्सा बने थे, जो अब 11 जिलों में रूपांतरित हो चुका हैं। सत्ताधारी भाजपा विदर्भ राज्य की प्रबल समर्थक रही है, लेकिन अब पार्टी के नेता विदर्भ प्रदेश की बात करने से भी कतराते हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सूबे के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर से हैं, लेकिन वे भी इस मुद्दे पर मौन हैं।

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