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अंतरराज्यीय सीमा विवाद: असम-मिजोरम के बीच मंत्रीस्तर की बैठक 17 को, कल अधिकारियाें के बीच होगी वार्ता

Tue, 15 Nov 2022 10:29 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 15 Nov 2022 10:29 PM IST
सार

मिजोरम के गृह विभाग के संयुक्त सचिव लालथियामसांगो सैलो ने बताया कि तीसरे चरण की मंत्रिस्तरीय वार्ता गुरुवार सुबह 11 बजे होगी। उन्होंने बताया कि मंत्रिस्तरीय वार्ता से एक दिन पहले यानि बुधवार को शाम 5 बजे दोनों पक्षों की अधिकारी स्तरीय वार्ता होगी। 

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border dispute Assam Mizoram ministerial meeting on 17th november talks between officials tomorrow
असम और मिजोरम के मुख्यमंत्री - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)

विस्तार

अमस और मिजोरम के बीच का अंतरराज्यीय सीमा विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। बुधवार को मिजोरम के गृह मंत्री लालचामलियाना के नेतृत्व में राज्य का एक प्रतिनिमंडल इसे हल करने के लिए गुवाहाटी रवाना होगा। असम के साथ मिजोरम की यह तीसरी मंत्रिस्तरीय वार्ता होगी। 

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मिजोरम के गृह विभाग के संयुक्त सचिव लालथियामसांगो सैलो ने बताया कि तीसरे चरण की मंत्रिस्तरीय वार्ता गुरुवार सुबह 11 बजे होगी। उन्होंने बताया कि मंत्रिस्तरीय वार्ता से एक दिन पहले यानि बुधवार को शाम 5 बजे दोनों पक्षों की अधिकारी स्तरीय वार्ता होगी। 
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गृह विभाग के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि वार्ता में लालचामलियाना के अलावा भूमि राजस्व मंत्री लालरुआत्मिका भी भाग लेंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि असम के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीमा क्षेत्र सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा कर सकते हैं। 
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दोनों राज्य 164.6 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा साझा करते हैं। मिजोरम और असम के बीच कुछ सीमा क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से विवाद है। 

क्या है राज्यों की सीमा का विवाद
मिजोरम साल 1972 में असम से अलग होकर एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बना था और 1987 तक यह पूर्ण राज्य बन गया था। दोनों राज्यों ने अतीत में 164.6 किलोमीटर लंबी इस अंतर-राज्यीय सीमा पर लड़ाई की है, जिससे कभी-कभी हिंसक झड़पे होती हैं। मिजोरम पक्ष के मुताबिक, असम के लोगों ने यथास्थिति का उल्लंघन किया है- जैसा कि कुछ साल पहले दो राज्य सरकारों के बीच सहमति हुई थी।

मिजोरम के मुताबिक असम के लैलापुर के लोगों ने यथास्थिति को तोड़ा है और कथित तौर पर कुछ अस्थायी झोपड़ियों का निर्माण किया है। मिजोरम के अधिकारियों के मुताबिक असम द्वारा दावा की गई जमीन पर मिजोरम के निवासियों द्वारा लंबे समय से खेती की जा रही है।

मिजोरम के दावे के मुताबिक यह जमीन उनकी है, 1875 की एक अधिसूचना पर आधारित है, जो 1873 के बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट से आई थी। इस एक्ट के अनुसार ब्रिटिशों ने उनके क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने और उन्हें नियंत्रित करने के नियम बनाए। अन्य राज्यों से आने वाले भारतीय नागरिकों के लिए इनर लाइन परमिट की व्यवस्था थी।  

वहीं, असम पक्ष राज्य सरकार द्वारा 1933 की एक अधिसूचना का हवाला देते यह जमीन अपनी मानता है। इस अधिसूचना में लुशाई हिल्स का सीमांकन किया गया था। औपनिवेशिक काल में मिजोरम को असम के एक जिले लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था। 1904 में लुशाई हिल्स का विलय किया गया और सीमा रेखा खींची गई। इसके बाद के संशोधनों के बाद असम और मिजोरम के बीच सीमा सरकारी अधिसूचना (1933) के अनुसार बनाई गई, जिस पर असम सरकार अभी भी कायम  है।


वहीं, मिजोरम पक्ष के नेताओं का मानना है कि सीमांकन को लेकर 1933 की अधिसूचना के लिए मिजो समाज से परामर्श नहीं लिया गया था। मिजोरम की सरकार मानना है कि सीमा का सीमांकन किया जाना चाहिए जैसाकि 1875 की अधिसूचना में कहा गया है, असम का पक्ष है कि 1933 के सीमांकन का पालन किया जाना चाहिए।

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