Book Launch: भारत-किर्गिस्तान के रिश्तों से रूबरू कराएगी ये किताब, मध्य एशियाई देशों से संबंध और होंगे मजबूत
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विस्तार
भारत और किर्गिस्तान के बीच संबंधों के अहम पहलुओं से रूबरू कराती लेखक डॉ. रमाकांत द्विवेदी की किताब ‘INDO-KYRGYZ RELATIONS CHALLENGES & OPPORTUNITIES’ ने बाजार में दस्तक दे दी है। इस किताब में भारत और किर्गिस्तान के बीच संबंधों, चुनौतियों और अवसरों का विस्तार से जिक्र किया गया है। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में इस किताब का विमोचन हुआ। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले प्रो. निर्मला जोशी ने सेमिनार के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद मुख्य वक्ता के रूप में वाइस एडमिरल (रिटा.) शेखर सिन्हा ने कहा कि इस किताब में भारत और किर्गिस्तान के रिश्तों, चुनौतियों और अवसरों के बारे में विस्तार से बताया गया है। मेरा मानना है कि किसी भी देश के साथ अगर आपको आर्थिक और सामरिक रिश्ते मजबूत करने हैं, तो पहले ह्यूमन-टू-ह्यूमन यानी दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्कों को और बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने कहा, तमाम देशों के साथ भारत के रिश्तों की मजबूती को इस रूप में भी देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के तमाम देशों की शख्सियतों के साथ काफी अच्छे रिश्ते हैं। कहने का मतलब है कि जब हमारे देश के लोगों के दूसरे देश के लोगों से रिश्ते मधुर होंगे और उनमें आपस में संपर्क बढ़ेगा, तो उन देशों के साथ हमारे सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक और सामरिक संबंधों में और मजबूती आएगी। इस किताब में मुख्य रूप से किर्गिस्तान और भारत के संबंधों, चुनौतियों और अवसरों के बारे में काफी रिसर्च के बाद बहुत विस्तार से लिखा गया है। मेरा मानना है कि यह किताब दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगी।
इस किताब को पेंटागॉन प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया है। किताब के लेखक डॉ. रमाकांत द्विवेदी ने कहा, यह किताब मुख्य रूप से मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों पर है। भारत और किर्गिस रिपब्लिक के बीच सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक मोर्चे पर क्या स्थिति है और हम इन संबंधों को किस तरह और अच्छा बना सकते हैं। उसके लिए क्या आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है? किताब में इसका विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, जब हमें ये ध्यान में आता है कि हमारी ही जैसी सोच, हमारी जैसी ही विचार करने की शैली और हमारे जैसे ही मूल्य किसी अन्य देश के लोगों के हैं, तो निकटता की भावना और प्रबल होती है। इसका जिक्र हमें महाकाव्यों में भी मिलता है। किर्गिस्तान महाकाव्य जिसे मनास कहते हैं, जब मैंने उसका वर्णन इसमें पढ़ा तो मुझे ऐसा लगा कि रामायण और महाभारत के साथ इसकी तुलना भी हो सकती है। मुझे लगता है कि इस किताब से दोनों देशों के संबंधों में और मजबूती आएगी। हालांकि, इसके लिए हमें किताबों के साथ-साथ अन्य उपायों पर भी जोर देना होगा।’
वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा कहा कि, इस किताब के लिए मैं रमाकांत द्विवेदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। इसमें उन्होंने दोनों देशों के तमाम पहलुओं को शामिल किया है। इस किताब से दोनों देशों के संबंधों में और प्रगाढ़ता आएगी व रिश्ते और मधुर होंगे। वर्षों से हमारे देश के किर्गिस्तान रिपब्लिक से अच्छे संबंध रहे हैं और हम वहां तमाम वस्तुओं का निर्यात भी करते हैं। मेरा मानना है कि इस किताब के बाद से दोनों देशों के संबंधों में और प्रगाढ़ता आएगी।