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RSS: संघ प्रमुख जिस किताब का कर रहे विमोचन उसका क्यों हो रहा विरोध? बॉलीवुड के इस शख्स ने किया है ट्रांसलेट

Thu, 16 Mar 2023 08:30 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 16 Mar 2023 08:30 PM IST
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सार
RSS: शुक्रवार की दोपहर संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत लाल किला पर होंगे। वे सामवेद पर मुस्लिम नेता द्वारा लिखी गई किताब का विमोचन करेंगे। हालांकि आयोजन के लिए चुना गया शुक्रवार का दिन और दोपहर की नमाज के बाद का वक्त के पीछे भी आरएसएस की खास रणनीति को वजह माना जा रहा है...
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book being released by the RSS chief being opposed? bollywood's iqbal durrani translated samved on Urdu
RSS: मोहन भागवत - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

लालकिला का प्राचीर भारतीय राजनीति में अहम मुकाम रखता है। देश के प्रधानमंत्री हर 15 अगस्त को देश को संबोधित करते हैं। लेकिन अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी लालकिला के जरिए मुस्लिमों में पैठ बनाने की अनोखी कोशिश कर रहा है। शुक्रवार की दोपहर संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत लाल किला पर होंगे। वे सामवेद पर मुस्लिम नेता द्वारा लिखी गई किताब का विमोचन करेंगे। हालांकि आयोजन के लिए चुना गया शुक्रवार का दिन और दोपहर की नमाज के बाद का वक्त के पीछे भी आरएसएस की खास रणनीति को वजह माना जा रहा है।

आयोजन का न्यौता देने के लिए संघ से जुड़े लोग दिल्ली की मस्जिदों में जाकर भी आग्रह करते हुए नजर आ रहे हैं। सामवेद के हिंदी और उर्दू का सचित्र अनुवाद के रूप में डॉ. इकबाल दुर्रानी की लिखी किताब का विमोचन भागवत के हाथों होगा। दुर्रानी परिवार बालीवुड से तो जुड़ा ही है। इकबाल दुर्रानी खुद एक दफा बसपा के टिकट पर गोड्डा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन वह चुनाव हार गए। बांका में जन्मे दुर्रानी को चर्चित चेहरा होने की वजह से टिकट मिला था।

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अब संघ के पाले में पहुंचे दुर्रानी के जरिए संघ भी मुस्लिमों के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। इस बीच आयोजन को लेकर चर्चा और आलोचनाओं का दौर भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया, सुधीजनों और संगठन के स्वयंसेवक डॉ. दुर्रानी और उनकी किताब को मिल रहे महत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। खांटी संघियों को आपत्ति है कि आखिर दूसरी विचारधारा से आए नए व्यक्ति को संघ इतना महत्व क्यों दे रहा है।

इसलिए चुना गया है लालकिला

इस कार्यक्रम के संयोजक जीवकांत झा अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं, 'सामवेद भारत के सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण वेद है। यह संस्कृत में है। डॉ. दुर्रानी ने संस्कृत से हिंदी में और हिंदी से उर्दू में अनुवाद किया है। किताब में एक पेज के ऊपरी हिस्से में संस्कृत का मंत्र है। जबकि बाएं तरफ हिंदी अनुवाद और दाएं तरह उर्दू तर्जुमा है। इसके साथ ही मंत्र को सचित्र बताया गया है। 1875 मंत्र को करीब 900 पन्नों में जगह दी गई है।'

लालकिला को आयोजन स्थल रखने के सवाल पर झा ने कहा कि, 'लालकिला देश की एतिहासिक जगह है। इसका भी अपना एक इतिहास है। 1657 में शाहजहां के पुत्र और औरंगजेब के भाई दारा शिकोह ने प्राचीन हिंदू शास्त्र उपनिषद का अनुवाद करने का प्रयास किया था, जिन्हें उनके भाई औरंगजेब ने मार दिया था। तब से इस्लाम ने हिंदू ग्रंथ का कोई दूसरा अनुवाद करने का साहस नहीं किया है। डॉ. दुर्रानी पहले ऐसे मुस्लिम हैं जिन्होंने ये अनुवाद करने की हिम्मत की है।'

कोई विरोध नहीं, संघ प्रमुख बतौर अतिथि हो रहे शामिल: आरएसएस

डॉ. इकबाल दुर्रानी के किताब विमोचन कार्यक्रम के बढ़ते विरोध पर झा कहना है कि 'किसी भी व्यक्ति की जीवन यात्रा में कई तरह के मोड़ आते हैं। दुर्रानी पहले फिल्म लाइन में काम करते थे। बाद में चुनावी राजनीति में भी आए। लेकिन 2015 में एक आश्रम में उन्हें वेद मिला। इसके बाद सामवेद के प्रति उनका झुकाव बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने इसका सचित्र अनुवाद किया। अब जो लोग कार्यक्रम और उनका विरोध कर रहे हैं, उन्हें भी लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार हासिल है।'

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नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला से चर्चा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक के वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं, 'इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख बतौर अतिथि शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम का कहीं कोई विरोध नहीं है।' इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में आरएसएस का अनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी आयोजक की भूमिका में है। मंच के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं कि इस कार्यक्रम का कोई विरोध नहीं है। डॉ. दुर्रानी ने सामवेद का हिंदी और उर्दू में अनुवाद किया है। उसी किताब का विमोचन है। इस कार्यक्रम में दुर्रानी न तो आरएसएस से जुड़ रहे हैं न ही आरएसएस उन्हें कोई उपाधि देने जा रहा है। यह महज एक किताब विमोचन कार्यक्रम है। कार्यक्रम में संघ प्रमुख के अलावा स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और स्वामी रामदेव भी शामिल हो रहे हैं।

किताब के जरिए मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाने का प्रयास

बॉलीवुड स्क्रिप्ट राइटर और फिल्ममेकर इकबाल दुर्रानी ने सामवेद का वैदिक संस्कृत से उर्दू और हिंदी में सचित्र अनुवाद किया है। संघ ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से मुस्लिम आबादी के एक बड़े वर्ग को प्राचीन भारतीय ग्रंथ के मूल पाठ को समझने में मदद मिलेगी और वो उसके संदेश को आत्मसात कर पाएगी, जो मानवता की भलाई के लिए है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के दिशा-निर्देश में आरएसएस मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाने के लगातार प्रयास कर रहा है। संघ का संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच भी लगातार समुदाय के साथ जुड़ा हुआ है। वहीं, कृष्ण गोपाल जैसे आरएसएस के शीर्ष नेता अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संघ को लेकर बेहतर समझ बनाने के लिए मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ संवाद करते रहे हैं। पिछले साल ही संघ प्रमुख भी दिल्ली के मदरसों में गए थे। उन्होंने कुछ उलेमाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी। बैठक में संघ प्रमुख ने कुछ उनकी सुनी और कुछ अपनी बातें रखी थीं। 2021 में मोहन भागवत की किताब 'भविष्य का भारत' का अनुवाद उर्दू में किया गया था। तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने उसका विमोचन किया था।

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