{"_id":"5c24badabdec2257245ffafd","slug":"bombay-high-court-takes-suo-moto-on-lawyer-slapped-judge-in-nagpur-district-session-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"बॉम्बे हाईकोर्ट ने जज को थप्पड़ मारने की घटना पर लिया स्वत: संज्ञान, जारी किया नोटिस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जज को थप्पड़ मारने की घटना पर लिया स्वत: संज्ञान, जारी किया नोटिस
Thu, 27 Dec 2018 05:13 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: अमित मंडल
Updated Thu, 27 Dec 2018 05:13 PM IST
विज्ञापन
bombay high court
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक सत्र अदालत के जज को कोर्ट परिसर में सहायक अभियोजक द्वारा कथित तौर पर थप्पड़ मारे जाने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है। बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर की अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति आर के देशपांडे ने बुधवार को कहा कि ऐसी घटनाएं "न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा" हैं।
बता दें कि सहायक लोक अभियोजक दिनेश पराते ने बुधवार दोपहर को नागपुर जिला एवं सत्र अदालत की सातवीं मंजिल पर एक लिफ्ट के बाहर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के आर देशपांडे को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया था।
पुलिस ने बताया कि वकील किसी मामले में न्यायाधीश के फैसले से नाराज था। पराते ने घटना के बाद भागने की कोशिश की लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया था।
विज्ञापन
अदालत ने पराते को एक नोटिस जारी कर छह हफ्ते के भीतर उनसे जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों ना की जाए।
विज्ञापन
बता दें कि सहायक लोक अभियोजक दिनेश पराते ने बुधवार दोपहर को नागपुर जिला एवं सत्र अदालत की सातवीं मंजिल पर एक लिफ्ट के बाहर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के आर देशपांडे को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया था।
विज्ञापन
पुलिस ने बताया कि वकील किसी मामले में न्यायाधीश के फैसले से नाराज था। पराते ने घटना के बाद भागने की कोशिश की लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया था।
विज्ञापन
"न्यायपालिका की आजादी पर खतरा"
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति देशपांडे ने अपने आदेश में कहा कि यह गंभीर मामला है जहां किसी न्यायाधीश की निजी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। हाईकोर्ट ने कहा, "यह न्यायपालिका की आजादी पर खतरा है। कानून के राज को कमजोर किया जा रहा है। ऐसा अपमानजनक व्यवहार बर्दाश्त करने की जरुरत नहीं है।"अदालत ने पराते को एक नोटिस जारी कर छह हफ्ते के भीतर उनसे जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों ना की जाए।