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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा: क्या शिकायतकर्ता विशेष अभियोजक के तौर पर किसी निश्चित वकील की नियुक्ति मांग सकता है?
Tue, 19 Apr 2022 05:29 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 19 Apr 2022 05:29 PM IST
सार
अदालत ने यह सवाल पुलिस हिरासत में मौत के एक मामले में पूर्व लोक अभियोजक को हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया।
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Bombay High Court
- फोटो : PTI (File)
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को जानना चाहा कि क्या किसी मामले में शिकायतकर्ता विशेष अभियोजन के तौर पर किसी निश्चिति वकील की नियुक्ति की मांग कर सकता है। न्यायाधीश पीबी वराले और एसएम मोदक की खंडपीठ ने असिया बेगम की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया।
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असिया बेगम, ख्वाजा यूनुस की मां हैं। यूनुस की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। याचिका में इस मामले से पूर्व विशेष लोक अभियोजक धीरज मिराजकर को हटाने के फैसले को चुनौती दी गई है। मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे समेत चार पुलिसकर्मी मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
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2018 में मिराजकर को मामले से हटाने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
मिराजकर को साल 2018 में इस मामले से हटा दिया गया था, जिसके बाद बेगम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मंगलवार को बेगम के वकील मिहिर देसाई ने अदालत को बताया कि हमने इस मामले में विशेष लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को तीन वरीलों के नामों का सुझाव दिया है।
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राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने पीठ को बताया कि सरकार सुझावों पर विचार करेगी और दो सप्ताह में नियुक्ति कर दी जाएगी। पीठ ने इस बयान को स्वीकार किया और कहा कि अगर कोई चौथा वकील नियुक्ति के लिए सही लगता है तो सरकार उसकी नियुक्ति भी कर सकती है।
यदि योग्य है तो किसी अन्य वकील की नियुक्ति भी कर सकती है सरकार
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता की ओर से सुझाए गए तीनों नामों को राज्य सरकार सकारात्मक तरीके से ले। राज्य सरकार अपने विवेक से विशेष लोक अभियोजक के रूप में योग्य उम्मीदवार का चयन कर सकती है, भले ही वह सुझाए गए तीन नामों में से कोई भी न हो।
बेगम ने अपनी याचिका में दावा किया है कि मिराजकर ने निचली अदालत के सामने सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी प्रफुल भोसले और तीन अन्य पुलिसकर्मियों को समन जारी करने और उनके खिलाफ हत्या के आरोप में मुकदमा चलाने के लिए आवेदन दिया था। इसी के बाद उन्हें मामले से हटाए जाने का फैसला लिया गया।
अभियोजन पक्ष के गवाह के दावे पर मिराजकर ने दायर किया था आवेदन
मिराजकर ने यह आवेदन तब दायर किया था जब अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह मोहम्मद अब्दुल मतीन ने अदालत के सामने यह दावा किया था कि उसने प्रफुल भोसले, तत्कालीन सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत देसाई और दो अन्य पुलिसकर्मियों को यूनुस पर पुलिस लॉकअप में हमला करते हुए देखा था।
वहीं, चार पुलिसकर्मियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सुभाष झा ने बेगम की याचिका में दखल देने की मांग की। हालांकि, पीठ ने कहा कि एक विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति इन पुलिसकर्मियों को प्रभावित नहीं करती है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि झा की बात अब अगली सुनवाई के दौरान सुनी जाएगी।
यूनुस को लास 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट में हिरासत में लिया गया था
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर ख्वाजा यूनुस को दिसंबर 2002 में हुए घाटकोपर बम विस्फोट मामले के बाद कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। वह कथित तौर पर 6-7 जनवरी 2003 की रात पुलिस हिरासत से भाग गया था, जब उसे पूछताछ के लिए औरंगाबाद ले जाया गया था और जीप अहमदनगर के पास पलट गई थी।
बाद में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने यूनुस की कथित तौर पर हिरासत में हत्या करने और सबूत नष्ट करने के लिए एफआईआर दर्ज की थी। सीआईडी जांच में 14 पुलिसकर्मी आरोपी थे, लेकिन सरकार ने केवल चार (वाजे, राजेंद्र तिवारी, राजाराम निकम, सुनील देसाई) के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।