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High Court: न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का मामला, हाईकोर्ट ने महिला को सुनाई जेल की सजा

Wed, 23 Apr 2025 03:47 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 23 Apr 2025 03:47 PM IST
सार

उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर सोसाइटी की प्रबंध समिति को आवारा कुत्तों को खाना खिलाए जाने से नाराजगी है तो उन्हें नगर निगम को इसकी सूचना देनी चाहिए थी न कि खुद ही निवासी का उत्पीड़न करना चाहिए था। 

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Bombay High court sentences woman to one week imprisonment for contemptuous remarks against judiciary
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महिला को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई है। दरअसल दोषी महिला ने अदालत को डॉग माफिया बताया था। अदालत ने इसे अपमानजनक मानते हुए कहा कि एक शिक्षित व्यक्ति से इस तरह की टिप्पणी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने विनीता श्रीनंदन को अदालत की अवमानना का दोषी मानते हुए एक सप्ताह साधारण जेल की सजा और 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने का आदेश दिया। 
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क्या है मामला
दरअसल नवी मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी और सोसाइटी की एक निवासी लीला वर्मा के बीच विवाद हुआ था। इस विवाद के चलते लीला वर्मा ने उच्च न्यायालय का रुख किया और आरोप लगाया कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के चलते हाउसिंग सोसाइटी की प्रबंध समिति द्वारा उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर सोसाइटी की प्रबंध समिति को आवारा कुत्तों को खाना खिलाए जाने से नाराजगी है तो उन्हें नगर निगम को इसकी सूचना देनी चाहिए थी न कि खुद ही निवासी का उत्पीड़न करना चाहिए था। 
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याचिकाकर्ता ने दिया कानून का हवाला
याचिकाकर्ता लीला वर्मा ने कहा कि कानून के तहत रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन को आवारा कुत्तों को अपने परिसर में खाना खिलाने की मंजूरी देनी चाहिए। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश है कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए तय जगह होनी चाहिए। लीला वर्मा का कहना है कि जब उन्होंने प्रबंध समिति के सदस्यों को भेजे ईमेल में ये जानकारी दी तो सदस्यों ने जजों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की। इसी ईमेल के आधार पर अदालत ने श्रीनंदन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की। हालांकि दोषी महिला के वकील की अपील पर अदालत ने सजा पर एक हफ्ते की रोक लगा दी है ताकि दोषी महिला फैसले के खिलाफ अपील कर सके। 

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