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Bombay High Court: महात्मा गांधी पर दुष्कर्मी ने लिखा निबंध, कोर्ट ने उम्रकैद की सजा घटाकर की 12 साल

Thu, 12 Feb 2026 05:06 AM IST
देवेश त्रिपाठी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 12 Feb 2026 05:06 AM IST
सार

अदालत ने सजा कम करने के अपने फैसले में कई कानूनी और मानवीय पहलुओं को रेखांकित किया। पीठ ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र केवल 20 वर्ष थी और उसका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं था।

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Bombay High Court reduced molestation Convict s life sentence Cites Essay On Mahatma Gandhi and his conduct
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 12 साल कर दिया है। अदालत ने यह उदारता दोषी द्वारा महात्मा गांधी के विचारों पर निबंध लिखने और पुस्तकों के विश्लेषण करने पर मिले प्रमाणपत्रों के आधार पर दिखाई है।
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जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह अपराध गंभीर है, लेकिन जेल में दोषी के आचरण और उसकी शिक्षा के प्रति रुचि को देखते हुए सजा में नरमी बरतना न्यायसंगत होगा।
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कोविड के दौरान भी नहीं मिली थी जमानत
अदालत ने सजा कम करने के अपने फैसले में कई कानूनी और मानवीय पहलुओं को रेखांकित किया। पीठ ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र केवल 20 वर्ष थी और उसका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं था। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से लगातार जेल में बंद है और उसे कोविड-19 महामारी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी जमानत नहीं मिली थी।
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न्यायाधीशों ने कहा कि इन सभी कारकों पर सामूहिक रूप से विचार करने के बाद सजा सुनाते समय कुछ नरमी दिखाई जानी चाहिए। कोर्ट ने न्यूनतम 10 साल की सजा के बजाय 12 साल की कैद को उचित माना, जिसमें उसके द्वारा पहले से काटी गई अवधि को समायोजित किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?
  • दिसंबर 2016 में मुंबई के घाटकोपर स्थित एक चॉल में रहने वाले 20 वर्षीय युवक ने अपनी पड़ोसी की पांच साल की मासूम बेटी का यौन उत्पीड़न किया था।
  • इस मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने 2020 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • दोषी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जहां सुनवाई के दौरान उसके वकीलों ने जेल प्रशासन द्वारा जारी तीन प्रमुख प्रमाणपत्र पेश किए।
  • इनमें पुणे के तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से पुस्तकों के विश्लेषण, रामचंद्र प्रतिष्ठान से निबंध प्रतियोगिता और मुंबई सर्वोदय मंडल द्वारा आयोजित गांधी विचार परीक्षा में सफलता के प्रमाण शामिल थे।

झूठी गवाही के दावों को कोर्ट ने किया खारिज
बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान यह तर्क भी दिया था कि बच्ची को उसके माता-पिता ने रंजिश के चलते सिखा-पढ़ाकर झूठी गवाही दिलवाई है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह नामुमकिन है कि पांच साल की बच्ची किसी के खिलाफ ऐसी झूठी और जटिल कहानी गढ़े। कोर्ट ने पीड़िता और उसकी मां के बयानों को स्वाभाविक और विश्वसनीय मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

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