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Maharashtra:बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा-क्या कार्यपालिका को लगता है न्यायपालिका छोटा बच्चा है?

Mon, 25 Jul 2022 09:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 25 Jul 2022 09:26 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि कार्यपालिका हमारे बारे में क्या सोचती है? क्या हम छोटे बच्चों की तरह हैं जिन्हें आप लॉलीपॉप दे सकते हैं और हम शांत हो जाएंगे? पीठ ने आगे कहा कि जब कार्रवाई की जाती है, तब तो एक महीने के लिए शौचालयों का रखरखाव किया जाएगा, लेकिन बाद में चीजें पहले की तरह हो जाएंगी।

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Bombay High Court pulls up Maharashtra government over dirty toilets in government schools
कोर्ट ने लगाई फटकार - फोटो : amar ujala

विस्तार

सरकारी स्कूलों के शौचालयों में गंदगी के मसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र सरकार को लताड़ लगाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra govt) को फटकार लगाते हुए कहा कि 'क्या कार्यपालिका को लगता है कि न्यायपालिका एक "छोटा बच्चा" है जिसे लॉलीपॉप से शांत किया जा सकता है।'  मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य भर के सरकारी स्कूलों के शौचालयों (dirty toilets) में स्वच्छता के उचित और प्रभावी प्रबंधन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।

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लॉ स्टूडेंट ने दाखिल की है याचिका
दरअसल, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ लॉ की छात्रा निकिता गोर और वैष्णवी घोलवे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में प्रभावी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों की विफलता पर चिंता व्यक्त की गई थी। इसके चलते महिलाओं और विशेष रूप से किशोर लड़कियों को परेशानी हो रही थी।
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16 शहरों के स्कूलों में किया था सर्वेक्षण
इस याचिका में सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए गंदे और अस्वच्छ शौचालयों और शौचालयों के मुद्दे के बारे में भी कहा गया है। लॉ की छात्रा निकिता गोर ने इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र के सात जिलों के 16 शहरों के स्कूलों में एक सर्वेक्षण किया था। उसके बाद मिले निष्कर्षों के आधार पर निकिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 
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अतिरिक्त सरकारी वकील भूपेश सामंत ने सोमवार को पीठ को बताया कि ऐसे सात स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कार्रवाई के संबंध में अदालत को दस्तावेज भी सौंपा। दस्तावेज देखने के बाद अदालत ने पिन किया कि दस्तावेज एक दिन पहले यानी 24 जुलाई, 2022 की थी। 

अदालत ने लगाई फटकार
जिसके बाद फटकार लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि कार्यपालिका हमारे बारे में क्या सोचती है? क्या हम छोटे बच्चों की तरह हैं जिन्हें आप लॉलीपॉप दे सकते हैं और हम शांत हो जाएंगे? पीठ ने आगे कहा कि जब कार्रवाई की जाती है, तब तो एक महीने के लिए शौचालयों का रखरखाव किया जाएगा, लेकिन बाद में चीजें पहले की तरह हो जाएंगी।


इसके बाद अदालत ने महाराष्ट्र जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (एमडीएलएसए) को ऐसे स्कूलों की निगरानी और औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।  पीठ ने कहा कि हम सभी डीएलएसए को निर्देश देते हैं कि वे प्राचार्य सीट के भीतर आने वाले प्रत्येक जिले के 15 ऐसे स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और अपनी रिपोर्ट हमारे सामने रखें। पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 15 अगस्त की तारीख दी है। 

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